टाइगर इमेज (प्रतीकात्म, सोशल मीडिया) 
बालाघाट

MP News: टाइगर स्टेट के कान्हा रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत; सामने आई चौंकाने वाली वजह

MP News: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई है, अधिकारियों के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि यह मौत सीडीवी वायरस के फैलने की वजह से हुई है।

सजल रघुवंशी

Tiger Death In Kanha Reserve Madhya Pradesh: 'टाइगर स्टेट' मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई है, अधिकारियों के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि यह मौत 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' यानी सीडीवी के फैलने की वजह से हुई है। भोपाल से आए वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की एक टीम ने मौत की जांच भी शुरु कर दी है।

एक मीडिया रिपोर्ट अधिकारियों के हवाले से यह दावा कर रही है कि सरही रेंज इलाके में एक बाघिन(T-114) जिसकी उम्र 10 साल बताई जा रही है। वह और उसके 1 साल के चार शावक बीमार पाए गए थे। बताया जा रहा है कि पहला शावक 21 अप्रैल को मारा गया था और जबकि दूसरे शावक का शव 24 अप्रैल को मिला था।

मामले की जांच जारी

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि बाघिन और उसके शावकों की मौत का कारण सांस संबंधी विकार और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इन्फेक्शन था, उन्होंने आगे बताया कि हम सीडीवी की संभावना से भी इंकार नहीं कर सकते हैं। इस वायरस(सीडीवी) की जांच के लिए लैब में सैंपल की भेजे जा चुके हैं।

10 दिन के अंदर 5 की मौत

मध्य प्रदेश के वन विभाग अधिकारियों के मुताबिक, 21 अप्रैल को पहले शावक की मौत हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल को दूसरे शावक का सड़ा-गला शव बरामद किया गया। शुरुआती जांच में वन विभाग ने मौत की वजह भूख बताई थी, यह कहते हुए कि मां के बिना शावक शिकार करने में सक्षम नहीं होते लेकिन 25 अप्रैल को तीसरा शावक भी मृत मिला, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू की गई।

फेंफड़ों में पानी भरने से हुई शावक की मौत

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि शावक की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुई थी। इसके बाद अधिकारियों ने बाघिन और उसके आखिरी जीवित बचे शावक की तलाश शुरू की। दोनों सरही क्षेत्र में बीमार हालत में मिले। उन्हें बेहोश कर 26 अप्रैल को मुक्की रेस्क्यू सेंटर भेजा गया।

सीडीवी फैलने की यह हो सकती है वजह

एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, मार्च में महुआ, अप्रैल में चिरौंजी और मई-जून में तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान ग्रामीण अपनी सुरक्षा के लिए कुत्तों के साथ जंगल में जाते हैं। ऐसे हालात में बाघों में सीडीवी संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस बीच, हाथियों के साथ गश्त करने वाली टीमें सरही क्षेत्र में सक्रिय हैं और बाघों की लगातार निगरानी कर रही हैं। साथ ही, उनके आसपास के इलाकों को भी सैनिटाइज किया जा रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर प्रकाश वर्मा ने बताया कि बाघिन और शावक के सैंपल आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जबकि पानी के नमूनों की भी जांच की जा रही है।

भारत-पाक सीमा के पास बड़ी साजिश नाकाम, श्रीगंगानगर में ट्रेन को उड़ाने की थी कोशिश, जांच में जुटी पुलिस

Explainer: कब-कब विवादों में घिरे धीरेंद्र शास्त्री? 10 बयानों पर हुआ विरोध, कई बार मांगनी पड़ी माफी

Diwali Trains: मुंबई-नागपुर के बीच 12 और स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 4 नवंबर से शुरू होगी बुकिंग; जानिए शेड्यूल

राहुल ने PM मोदी को दी खुली चुनौती: बोले- डरिए मत, मंच पर आमने-सामने बैठिए; राजनाथ-समेत 4 नेताओं से की अपील

SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब तो भी भर सकेंगे फॉर्म-6, चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत