

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में संचालित जैव विविधता संरक्षण के अगले अध्याय के रूप में आज जंगली भैंसा पुनर्स्थापना योजना का शुभारंभ किया। इसके तहत मुख्यमंत्री ने कान्हा टाइगर रिजर्व में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम से लाए गए जंगली भैंसों के पुनर्स्थापना के लिए उन्हें बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में सॉफ्ट रिलीज किया। CM ने प्रदेश की धरती पर नए मेहमान के शुभ आगमन के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी।
CM ने कहा कि प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। लगभग 100 वर्ष के बाद प्रदेश की धरती पर जंगली भैंसे का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना कार्य हो रहा है। यह MP के वन्य-जीव एवं वन पारिस्थितिक संरक्षण के लिए अद्भुत अवसर है। जंगली भैंसे के पुनर्वास से घास के मैदान के संरक्षण और इको सिस्टम को मदद मिलेगी। इससे जंगल, वन्य प्राणियों से समृद्ध होगा और स्थानीय स्तर पर टूरिज्म से लोगों को रोजगार भी मिलेगा। जंगली भैंसे की ट्रांसलोकेशन से असम के साथ मध्यप्रदेश का एक नया रिश्ता कायम हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बालाघाट जिले के जंगल में छोड़े गए जंगली भैंसों में तीन मादा और एक नर शामिल है। सभी जंगली भैंसे युवा अवस्था में हैं और स्वस्थ हैं। सीएम ने कहा कि MP आज टाइगर और चीता स्टेट है। प्रदेश में मगरमच्छ, घड़ियाल और भेड़िया भी पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं। राज्य अब "वल्चर स्टेट" यानी गिद्ध स्टेट भी बना है।
मध्यप्रदेश की धरा हर तरह के वन्य प्राणियों से समृद्ध है। कई सौ साल पहले विलुप्त हुए पर प्राणियों के पुनर्स्थापना से प्रदेश के समृद्ध वनों में वन्य प्राणियों के संरक्षण का सपना साकार हो रहा है। 2022 में चीतों का पुनर्वास हुआ। आज कूनो अभयारण्य के बाद गांधी सागर अभ्यारण्य में भी चीते दौड़ लगा रहे हैं। सागर के पास नोरादेही अभयारण्य में भी चीतों को बसाने की पूरी तैयारी है। यह सभी कार्य प्रदेश के लिए धरोहर होंगे।