Balaghat Tribal Children Deaths : बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा अंचल में आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही मौतों का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बच्चों की मौतों पर चिंता जताई और प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच, इलाज और राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) ने प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग करते हुए प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है।
राहुल गांधी ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत की खबर बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। उनके मुताबिक घातक बीमारी के साथ पीने के पानी, पोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी बच्चों की जान के लिए गंभीर खतरा है। राहुल गांधी ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए मुख्यमंत्री से मामले का समाधान करने और क्षेत्र में तत्काल जांच, उपचार एवं राहत उपलब्ध कराने की अपील की।
बालाघाट में बच्चों की मौतों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और स्थानीय संगठनों के दावों में अंतर सामने आया है। उपलब्ध प्रशासनिक सूची में 25 बच्चों के नाम बताए गए हैं, जिनकी उम्र करीब एक से 14 वर्ष के बीच है। दूसरी ओर स्थानीय संगठनों और अन्य सूत्रों की ओर से करीब 30 बच्चों की मौत का दावा किया जा रहा है। ऐसे में वास्तविक मौतों की संख्या को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
मामले के बीच क्षेत्र में अब तक पांच झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। बैहर-बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 24 मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की सहायता राशि दिए जाने की बात सामने आई है। हाल में गजेंद्र नाम के बच्चे की मौत के बाद दुर्गम आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर उपचार को लेकर सवाल फिर उठे हैं।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मृत बच्चों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता या मुआवजे की मांग की है। पार्टी ने संक्रामक बीमारियों से हुई मौतों की परिस्थितियों, प्रशासनिक लापरवाही, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
ज्ञापन में प्रभावित गांवों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराने और तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की गई है। साथ ही पर्याप्त चिकित्सकीय दल, जरूरी दवाइयां, स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। आदिवासी कांग्रेस ने भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने शनिवार को अपनी हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को 15 दिन में आवश्यक कदम उठाने का समय दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि इस अवधि में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब प्रशासन की जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सभी की नजर है।