छतरपुर में RSS कार्यकर्ता की आत्महत्या पर बवाल, सर्व समाज ने निकाली रैली, SP ने दिए जांच के आदेश

Chhatarpur Protest : छतरपुर में RSS कार्यकर्ता पुष्पेंद्र सिंह परमार की आत्महत्या पर सर्व समाज ने रैली निकालकर SP को ज्ञापन सौंपा। पुलिस पर गंभीर आरोपों के बाद बिजावर SDOP को जांच के आदेश दिए गए।
Sarva Samaj Rally in Chhatarpur
सर्व समाज की रैली(फोटो सोर्स- नवभारत)
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Chhatarpur RSS Worker Suicide : छतरपुर में RSS कार्यकर्ता पुष्पेंद्र सिंह परमार की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सर्व समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में रैली निकाली और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस के कथित ढुलमुल रवैये और कार्रवाई के दबाव के कारण पुष्पेंद्र सिंह परमार मानसिक रूप से परेशान थे और उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

पुष्पेंद्र सिंह परमार की मौत के मामले में सर्व समाज के लोग एकजुट होकर सड़क पर उतरे। बड़ी संख्या में लोगों ने रैली निकालते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद प्रदर्शनकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

परिवार ने लगाए झूठे केस में फंसाने के आरोप

मामला छतरपुर के रगौली निवासी पुष्पेंद्र सिंह परमार से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि एक लड़की और उसके पिता-चाचा की ओर से लगाए गए आरोपों में पुष्पेंद्र को भी गलत तरीके से आरोपी बनाया गया। परिवार के मुताबिक, पुष्पेंद्र लड़की के पिता के मित्र थे और उन्होंने पूरे मामले में सहयोग किया था। परिजनों का आरोप है कि सहयोग करने के बावजूद उन्हें इस प्रकरण में झूठा फंसा दिया गया।

पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल

मृतक के भाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुष्पेंद्र को मामले में झूठा आरोपी बनाया गया और पुलिस के रवैये के कारण वह लगातार परेशान थे। परिवार का आरोप है कि यदि पुलिस ने मामले में निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की होती तो शायद पुष्पेंद्र को यह कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

POCSO एक्ट में फंसाने की धमकी का आरोप

प्रदर्शन कर रहे संगठन के लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पुष्पेंद्र पर POCSO एक्ट लगाने की धमकी दी थी। संगठन का दावा है कि मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी, उसके बजाय पुष्पेंद्र पर ही कार्रवाई का दबाव बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लेनदेन जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की भी पुलिस स्तर से पुष्टि होना बाकी है।

SP ने बिजावर SDOP को सौंपी जांच

मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए बिजावर SDOP को जांच के आदेश दिए हैं। अब SDOP पूरे मामले से जुड़े आरोपों, पुलिस की कार्रवाई और घटनाक्रम की जांच करेंगे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुष्पेंद्र की आत्महत्या के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार और हिंदू संगठनों का कहना है कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल SP के निर्देश के बाद जांच शुरू होने से परिजनों और प्रदर्शनकारियों को मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है।

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