Dyslexia Awareness: बच्चे का पढ़ाई में मन न लगना या पढ़ने-लिखने में बार-बार परेशानी होना हमेशा इसका कारण उसकी लापरवाही या आलस नहीं होता है। कुछ बच्चों में इसके पीछे डायलेक्सिया जैसी लर्निंग डिफिक्लटी भी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शब्दों को पढ़ने और भाषा से जुड़ी कुछ चीजें सीखने में परेशानी होती है।
वर्ल्ड डायलेक्सिया डे के मौके पर बच्चों में दिखने वाले ऐसे संकेतों के बारे में जागरूकता होना जरूरी है।
बच्चा अपनी उम्र और कक्षा के दूसरे बच्चों की तुलना में पढ़ने में अधिक कठिनाई का सामना करता है। वह शब्दों को पहचानने या उन्हें सही तरीके से पढ़ने में बार-बार अटक सकता है।
कुछ बच्चों को मिलते-जुलते अक्षरों या शब्दों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। पढ़ते समय वे शब्द छोड़ सकते हैं, बदल सकते हैं या किसी शब्द को बार-बार गलत पढ़ सकते हैं। जैसे-b-d, 9-6 आदि।
बच्चा किसी वाक्य को पढ़ते समय बार-बार रुकता है या एक ही शब्द को दोबारा पढ़ता है। पढ़ने में उसकी टाइमिंग भी दूसरे बच्चों की तुलना में धीमी हो सकती है।
एक ही शब्द की स्पेलिंग को बच्चा कई बार अलग-अलग तरीके से लिखता है। अभ्यास करने के बाद भी कुछ सामान्य शब्दों की स्पेलिंग को याद रखने में उसे लगातार परेशानी होती है।
कुछ बच्चे कक्षा में जोर से पढ़ने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें शब्दों को पहचानने या सही तरीके से पढ़ने में कठिनाई होती है। धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। इससे वे रीडिंग एक्टिविटी को लेकर झिझकने लगते हैं।
होमवर्क या लिखने-पढ़ने से जुड़े काम को पूरा करने में बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से ज्यादा समय लगने लगता है। लगातार मेहनत के बावजूद पढ़ने-लिखने में सुधार नहीं हो पाता है।
डायलेक्सिया पीड़ित कुछ बच्चों को शब्दों को उनकी अलग-अलग साउंड में बांटने या पहचानकर उससे जुड़े लेटर या अक्षर समझने में कठिनाई होती है। यह सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
डायलेक्सिया का होना बच्चे की बुद्धिमत्ता कम होने का संकेत नहीं है। कई बच्चों की रुचि दूसरे क्षेत्र में हो सकती है। इसलिए बच्चे को आलसी, कमजोर या ध्यान नहीं देता कहकर बार-बार डांटना समस्या को और मुश्किल बना सकता है। बच्चे की परेशानी को समझना और उसे सीखने का सही तरीका समझाना ज्यादा जरूरी है।
अगर पढ़ने-लिखने से जुड़ी परेशानियां लगातार बनी हुई हैं और बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो टीचर या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। जल्दी पहचान होने पर बच्चे की मदद करना आसान हो जाता है।