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Travel Trends: घूमने निकले हैं, फिर भी होटल से बाहर निकलने का मन नहीं? Gen Z में बढ़ रहा ‘रूम रॉटिंग’ ट्रेंड

Room Rotting Trend: छुट्टी का मतलब अब हर घंटे घूमना, फोटो लेना और लिस्ट पूरी करना नहीं रह गया है। Gen Z के लिए होटल रूम में आराम करना, नींद, खाना और खाली समय बिताना भी हॉलिडे का हिस्सा हैं।

रीता राय सागर

Room Rotting Travel Trends: जब भी हम छुट्टियों की प्लानिंग करते हैं, तो एक लिस्ट तैयार करते हैं कि उस ट्रैवलिंग डेस्टिनेशन पर किन जगहों पर घूमना है, लेकिन नई पीढ़ी के लिए ट्रैवलिंग का मतलब कमरे में चिल करना है।

इसी सोच को सोशल मीडिया और ट्रैवल कल्चर में रूम रॉटिंग कहा जाता है। इसमें लोग छुट्टी मनाने वाली जगह पर पहुंचने के बाद हर जगह घूमने की बजाय होटल रूम में रहकर सोना, खाना, फिल्म देखना, बुक रीडिंग या बस आराम करना पसंद करते हैं।

छुट्टी में क्यों करना इतना आराम?

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई लोग एक रूटीन वाली लाइफस्टाइल से इतर सुकून को तवज्जो देते हैं, जिसमें लाइफ स्लो हो। ऐसे में अगर हॉलिडे का हर दिन सुबह से रात तक एक्टिविटी से भर दिया जाए, तो आराम के बजाय थकान और बढ़ जाती है।

ऐसे लोगों के लिए होटल में सुकून से पूरा दिन बिताना समय बर्बाद करना नहीं, बल्कि उस थकान से बाहर निकलने का तरीका है।

‘मस्ट-डू’ लिस्ट से ऊब रहे हैं लोग

सालों तक ट्रैवल का मतलब उस शहर की मशहूर चीजों को एक्सप्लोर करना, हर जगह फोटो लेना और लौटकर कहना कि कुछ भी मिस नहीं किया, रहा है। लेकिन अब युवा इस तरह की चेकलिस्ट या मस्ट डू लिस्ट को अवॉयड कर रहे हैं। होटल में रहना इस दबाव को कम करता है- न कोई टाइमटेबल, न कहीं पहुंचने की जल्दी और न हर अनुभव को कैमरे में कैद करने की जरूरत।

लग्जरी अब ‘कुछ न करना’ है

रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे फैसले लेना दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है, जैसे- क्या खाना है, कहां जाना है, किससे मिलना है, कब काम करना है। छुट्टी में इन फैसलों से दूरी बनाना भी मेंटल पीस का हिस्सा है। इसलिए किसी खूबसूरत होटल में रहकर देर तक सोना, कमरे में खाना मंगाना या खिड़की के पास बैठकर बाहर का नजारा देखना भी लग्जरी है।

हर समय कमरे में रहना आराम नहीं होता है

बता दें कि कमरे में आराम करना और रूम रॉटिंग दोनों में फर्क है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर कमरे में रुककर पढ़ता है, सोता है, फिल्म देखता है या बस आराम करता है और इससे उसे मानसिक रूप से बेहतर महसूस होता है, तो यह एक डाउन टाइम हो सकता है, जब कि अगर कमरे से बाहर निकलने का मन नहीं करता। किसी एक्टिविटी, बातचीत या छोटे-से चेंज के बारे में सोचना भी बहुत भारी लग रहा है, तो अलग बात हो सकती है।

ट्रिप में डाउनटाइम को करें ऐड

अगर आप हर छुट्टी में पूरे दिन को एक्टिविटी से पूरा भर देने की आदत रखते हैं, तो इस बार की आइटिनरी में कुछ घंटों को खाली छोड़ दें। सुबह देर तक सोना, कमरे में नाश्ता करना, किताब पढ़ना, खिड़की से बाहर देखना या बिना किसी टारगेट के यूं ही नए शहर की नई सड़क पर घूमना भी यात्रा का हिस्सा हो सकता है।

हालांकि, रूम रॉटिंग को हर ट्रिप का डिफॉल्ट मोड बनाना जरूरी नहीं है। थोड़ा आराम, थोड़ा घूमना, अच्छा खाना और आसपास की जगह को अपने मूड के से महसूस करना भी एक परफेक्ट बैलेंस छुट्टी हो सकता है।

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