अंकिता पटेल
96 किलोमीटर लंबे इस सफर में ट्रेन 102 सुरंगों और 82 पुलों से होकर गुजरती है। हरे-भरे देवदार के जंगल, गहरी घाटियां और छोटे पहाड़ी कस्बे इस यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज रूट को बेहद खास बनाते हैं।
"टॉय ट्रेन" के नाम से मशहूर यह रूट 1881 में बना था और आज भी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा रखता है। रास्ते में चाय के बागान और कंचनजंगा पर्वत के मनमोहक नजारे इस सफर को यादगार बनाते हैं।
महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक को जोड़ने वाला यह रूट सह्याद्री पर्वतमाला, अरब सागर, झीलों और झरनों के बीच से गुजरता है। यह भारत के सबसे खूबसूरत तटीय रेल सफर में से एक माना जाता है।
तमिलनाडु में ऊटी और कुन्नूर के बीच चलने वाला यह सिर्फ 26 किलोमीटर का सफर 16 सुरंगों से होकर गुजरता है। धीमी रफ्तार और हरी-भरी पहाड़ियां इसे एक शांत और सुकूनभरा अनुभव बनाती हैं।
यह सफर आपको समुद्र के ऊपर बने प्रसिद्ध पंबन ब्रिज से गुजरने का अनोखा अनुभव देता है, जो भारत में पानी के ऊपर बना दूसरा सबसे लंबा पुल माना जाता है।
माथेरान वह जगह है, जहां गाड़ियों के साथ-साथ साइकिल तक की अनुमति नहीं है। इस नैरो गेज ट्रेन की धीमी और घुमावदार यात्रा पश्चिमी घाट की खूबसूरती को करीब से निहारने का भरपूर मौका देती है।
धौलाधार पर्वतमाला की गोद में बसा यह रूट हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता है। "कांगड़ा टॉय ट्रेन" के नाम से मशहूर यह सफर शांति और सुकून चाहने वाले यात्रियों की पहली पसंद है।
"डेजर्ट क्वीन" के नाम से मशहूर यह रूट थार रेगिस्तान की विशालता, रेत के टीलों और वहां की अनोखी संस्कृति को दिखाता है, जो इसे बाकी सभी रेल मार्गों से बिल्कुल अलग बनाता है।
गोवा से कर्नाटक के बीच चलने वाला यह सफर आपको प्रसिद्ध दूधसागर झरने के अद्भुत नजारे दिखाता है। करीब 4 घंटे की इस यात्रा में पश्चिमी घाट की हरियाली और खूबसूरत समुद्र तट भी नजर आते हैं।