महिला राजनयिक (फोटो.सोशल मीडिया) 
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Women In Diplomacy: जानिए भारत की उन महिला राजनयिकों के बारे में जिन्होंने वैश्विक मंच पर बनाई अलग पहचान

International Day Of Women In Diplomacy: भारत की कूटनीति में महिलाओं का योगदान आजादी के शुरुआत से ही अहम रहा है। सी. बी. मुथम्मा, विजय लक्ष्मी पंडित और रुचिरा कंबोज जैसी महिलाओं ने इतिहास रचा है।

रीता राय सागर

International Day Of Women In Diplomacy 2026: आजादी के शुरुआती दौर से ही भारतीय महिलाओं का भारत की राजनीति में हस्तक्षेप रहा है। आजादी की लड़ाई के नेताओं से लेकर आधुनिक दौर के राजनयिकों तक, उनका प्रभाव हर क्षेत्र तक फैला हुआ है, जिसने भारत को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में खड़ा किया है।

जब दुनिया के मंच से राजदूत रुचिरा कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर पद संभाला, तो उन्होंने कहा, आज भारत की कूटनीति में सबको साथ लेकर चलने की ताकत दिखती है। लेकिन सबको साथ लेकर चलना सिर्फ दिखावा नहीं है- अगर भारतीय कूटनीति में महिलाओं की भागीदारी नहीं होगी, तो यह खतरे में पड़ जाएगी।

सशक्त नींव रखना

1949 में, सी. बी. मुथम्मा भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुईं। वह ऐसा दौर था जब शादी के बाद महिलाओं से इस्तीफा देने की उम्मीद की जाती थी। बिना डरे, उन्होंने विदेश मंत्रालय के भेदभावपूर्ण नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, अपना करियर बचाया और एक मिसाल कायम की। IFS में महिलाओं की औपचारिक भूमिका शुरू होने से पहले ही, विजय लक्ष्मी पंडित ने दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1953 में वह संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने नए आजाद हुए देशों की वकालत करते हुए शीत युद्ध के तनाव को अपनी समझदारी से संभाला।

रणनीतिक नेतृत्व में महिलाएं

पहला निर्णायक संस्थागत बदलाव 2001 में आया, जब चोकिला अय्यर भारत की पहली महिला विदेश सचिव बनीं, जिससे यह साबित हुआ कि विदेश नीति के नेतृत्व में लैंगिक सीमाएं बाधा नहीं होतीं हैं।

निरुपमा राव भारत की पहली महिला विदेश मंत्रालय प्रवक्ता बनी, जिन्होंने भारत-चीन सीमा वार्ता का संचालन किया। इसके बाद चीन में राजदूत और अंततः विदेश सचिव बनीं।

मीरा शंकर ने भी संयुक्त राज्य अमेरिका में राजदूत के रूप में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

महिलाएं और भारत की इकोनॉमिक डिप्लोमेसी

वर्तमान समय में डिप्लोमेसी का दायरा सिर्फ राजनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं है। भारत की आर्थिक और विकास से जुड़ी रणनीति में महिलाओं की भूमिका अहम है। अपर्णा सुब्रमणि ने भारत की सस्टेनेबल ग्रोथ की प्राथमिकता के अनुसार रूप वर्ल्ड बैंक की पहल को आगे बढ़ाया है, वहीं रीवा गांगुली दास ने सेक्रेटरी के तौर पर भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को मज़बूत किया है।

रुचिरा कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि और 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा।

भारत की महिला डिप्लोमेट्स

1940–1950: सी. बी. मुथम्मा – पहली महिला IFS अधिकारी और भारत की पहली महिला राजदूत।

1950: विजय लक्ष्मी पंडित – संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष और कई बार राजदूत के तौर पर काम किया।

1960–1970: चोकिला अय्यर – भारत की पहली महिला विदेश सचिव।

1970–2000: निरुपमा राव – चीन में पहली महिला राजदूत।

मीरा शंकर – अमेरिका में पहली महिला राजदूत।

1980–2020: दीपा गोपालन वाधवा – खाड़ी देश (कतर) और जापान में पहली भारतीय महिला राजदूत।

2024: रुचिरा कंबोज – संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि।

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