नवभारत संपादकीय: विकास की शिल्पकार महिलाएं, पर राजनीति में अब भी कम भागीदारी

Women Political Participation: भारत के विकास में महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है, जो समान भागीदारी की चुनौती को दर्शाता है।
Navbharat Editorial: Women—The Architects of Development, Yet Still Underrepresented in Politics
महिला सशक्तिकरण( सोर्स: सोशल मीडिया )
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India Women Representation Statistics: भारत की विकास यात्रा में महिलाएं सिर्फ सहभागी ही नहीं, बल्कि शिल्पकार भी हैं। उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश में सुशिक्षित, आर्थिक दृष्टि से सक्रिय तथा समाज में गौरवशाली स्थान बना चुकी महिलाएं विधायी भूमिका में आने को तत्पर हैं।

इस समय देश में 30 करोड़ से अधिक महिलाओं के जनधन खाते हैं। माइको क्रेडिट तथा स्वयं सहायता समूह कार्यक्रमों के लाभार्थियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की तादाद बढ़ी है।

विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग व गणित के क्षेत्रों में महिलाएं तेजी से आगे आ रही हैं। सशस्त्र सेनाओं में भी उनकी भागीदारी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में 74 महिलाएं निर्वाचित हुई थीं लेकिन यह सदन की कुल सदस्य संख्या का केवल 13.6 प्रतिशत था।

2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में यह 14.4 प्रतिशत गिरावट थी, 2025 में भारत की विधानसभाओं में सिर्फ 9 प्रतिशत महिला सदस्य थीं। निर्वाचित सांसदों, विधायकों की कुल संख्या 4,666 है जिनमें महिलाएं सिर्फ 464 हैं अर्थात यह संख्या केवल 10 प्रतिशत है।

विश्व के देशों में महिलाओं के संसदीय प्रतिनिधित्व के मामले में भारत बहुत पीछे है। वैश्विक औसत 27.6 प्रतिशत का है और भारत इस मामले में 143 वें स्थान पर है।

जिस देश की राजनीति में एनी बेसेंट, मैडम कामा, सरोजिनी नायडू, विजयालक्ष्मी पंडित, सुचेता कृपलानी, अरुणा आसफअली, इंदिरा गांधी, राजकुमारी अमृत कौर, पद्मजा नायडू, मीरा कुमार, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, वसुंधरा राजे जैसी कितनी ही महिलाएं सक्रिय रहीं, वहां उनका प्रतिशत संसद और विधानसभा में बढ़ना चाहिए था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

महिलाएं परिवार, समाज व देश को बेहतर तरीके से समझती हैं। सितंबर 2023 में पारित नारीशक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है।

यह एक संवैधानिक सच्चाई बन गया है। सिर्फ इसे लागू किया जाना बाकी है। महिला आरक्षण का कोई पार्टी विरोध नहीं करती लेकिन चुनाव में एक तिहाई सीट महिलाओं को देने के लिए कोई भी पार्टी पहल करती दिखाई नहीं दी।

पंचायत राज में भी आरक्षण लागू किया गया लेकिन कितनी ही पंचायतों में महिला सरपंच की बजाय उसका पति फैसले करता है। इस पर निगरानी रखने की आवश्यकता है।

चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभाओं की सदस्य संख्या बढ़ाई जाएगी। इसमें सीटों का पुनर्निर्धारण कर महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाएगा। महिलाओं का सशक्तिकरण राजनीति को नई दिशा देगा।

पंचायत राज में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसे क्षेत्रों में महिला सरपंचों की उल्लेखनीय भूमिका है। अभी स्थानीय निकायों में 14.5 लाख या 46 प्रतिशत महिलाएं हैं।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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