श्री श्री रविशंकर Source- Social Media
हेल्थ

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विशेष, थककर बेहाल न हो जायें, बस इसे अपनायें 

World Mental Health Day: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आइए जानते हैं कि ध्यान, गहरी श्वास, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद से तनाव कम करने और ऊर्जा बनाए रखने में कैसे मदद मिल सकती है।

अर्पित शुक्ला

लेख- गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

World Mental Health Day: तनाव आज ईश्वर की तरह सर्वव्यापी हो गया है, यह हर जगह मौजूद है। आखिर तनाव है क्या? मैं इसे इस प्रकार परिभाषित करता हूँ- काम बहुत अधिक हो, समय बहुत कम हो और उसे करने के लिए ऊर्जा न हो। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तनाव हमारी ऊर्जा को इस हद तक सोख लेता है कि दिन आरंभ होने से पहले ही हम स्वयं को थका हुआ अनुभव करने लगते हैं। आज इसी अवस्था को बर्नआउट कहा जाता है। तो इससे मुक्ति कैसे पाई जाए?

एक उपाय तो यह है कि काम का बोझ कम कर दिया जाए, पर आज के समय में यह सहज संभव नहीं लगता। दूसरा विकल्प है कि उपलब्ध समय को बढ़ा दिया जाए, जो लगभग असंभव है। ऐसे में हमारे पास एक ही उपाय बचता है, अपनी ऊर्जा के स्तर को बढ़ाना। जब हमारे भीतर पर्याप्त ऊर्जा और उत्साह होता है, तब हम जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने और उसे सँभालने में सक्षम होते हैं।

ध्यान कैसे करें?

अपनी ऊर्जा बढ़ाने के लिए ध्यान और सुदर्शन क्रिया जैसी श्वास-प्रक्रियाएँ अत्यंत सहायक हैं। ये तकनीकें कुछ ही मिनटों में हमारे ऊर्जा-स्तर को बढ़ाने में मदद करती हैं। निस्संदेह, नींद आवश्यक है; लेकिन नींद से मिलने वाला विश्राम एक प्रकार का निष्क्रिय विश्राम है। सचेत विश्राम ध्यान से प्राप्त होता है।

ध्यान का अर्थ यह नहीं कि बैठकर किसी विषय के बारे में सोचते रहें। बहुत-से लोग मन में निरंतर कुछ-न-कुछ करते रहते हैं; कुछ कल्पना करते हैं, कुछ दृश्य मन में रचते हैं। दुर्भाग्य से, यह ध्यान नहीं है। ध्यान का अर्थ है, पूर्णतः छोड़ देना, सहज होना और गहन विश्रांति में उतर जाना।

लोगों ने अनुभव किया है कि 20 मिनट का ध्यान उन्हें 8 या 10 घंटे की नींद से भी अधिक ऊर्जावान अनुभव करा सकता है।

ऊर्जा के चार प्रमुख स्रोत

ऊर्जा के चार प्रमुख स्रोत हैं, आहार, निद्रा, श्वास और शांत एवं ध्यानमय मन। संतुलित और पौष्टिक आहार लें, वह भी संयमित मात्रा में। प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की नींद लें, न उससे अधिक, न कम। गहरी श्वास की कुछ सरल विधियाँ सीखें और प्रातः तथा सायंकाल 15–20 मिनट ध्यान करें। इतना ही पूरे दिन आपको ऊर्जावान बनाए रखने के लिए पर्याप्त हो सकता है। अपने ऊर्जा-स्तर में अंतर आप तुरंत अनुभव करेंगे।

आध्यात्मिक ज्ञान भी हमें एक विशिष्ट प्रकार की ऊर्जा प्रदान करता है, और इन सभी में ध्यान का स्थान सर्वोपरि है।

ऊर्जा के स्रोतों से जुड़िए

ध्यान के अतिरिक्त, जब भावनाएँ हमारी बुद्धि पर हावी होने लगती हैं, तब संतुलन पुनः प्राप्त करने में श्वास एक अत्यंत व्यावहारिक साधन बन सकती है। सुदर्शन क्रिया भावनाओं के इस प्रबल प्रवाह से उबरने में अत्यंत सहायक होती है। यह मानो भीतर एक स्वचालित वाल्व की तरह कार्य करती है, जो नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रण से बाहर होने से रोकने में सहायता करती है।

अतः जीवन की व्यस्तता के बीच स्वयं को खोने के बजाय, अपनी ऊर्जा के स्रोतों से जुड़िए।
मानसिक तनाव को जीवन पर हावी न होने दें, कुछ क्षण रुकें, गहरी श्वास लें, ध्यान करें और भीतर की ऊर्जा को फिर से जागृत होने दें।

Delhi CJP Protest LIVE: दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल को लिया हिरासत में, ममता-दिपके-सौरव-आशुतोष भी डिटेन

तानाशाह कैसे बनें डॉक्यूमेंट्री राेज देखते है अमित शाह! राज ठाकरे का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

6 महीने में गिर जाएगी मोदी सरकार! संजय राउत की भविष्यवाणी से मची सियासी खलबली

सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी वाले लोन पर बड़ा अपडेट, चार कंपनियों ने दिया सेटलमेंट ऑफर

ओमानी को-पायलट हम्मामी को लेकर बड़ा खुलासा! मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ाव, चरमपंथ और आतंकवाद से था प्रभावित