बंगाली लाल पाड़ साड़ी फोटो.सोशल मीडिया
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Durga Puja Fashion: बंगाल की लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी ही क्यों बनी दुर्गा पूजा की पहचान, जानें इसकी कहानी

Lal Paar Saree: दुर्गा पूजा में लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी बंगाली महिलाओं के पारंपरिक लुक की पहचान मानी जाती है। जानिए इस साड़ी का इतिहास, लाल-सफेद रंग का महत्व और दुर्गा पूजा से इसका खास रिश्ता।

रीता राय सागर

Bengali Traditional Durga puja Look: दुर्गा पूजा आते ही बंगाल की गलियों से लकेर पूजा पंडालों में एक खास रंग दिखाई देने लगता है- सफेद और लाल पाड़ वाली साड़ी का। यह सिर्फ एक साड़ी नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति और दुर्गा पूजा से जुड़ी एक खास पहचान है, जिसे पहनने का तरीका भी अलग है।

आज महिलाएं तांत, गोरद, जामदानी, सिल्क और दूसरी पारंपरिक साड़ियों में भी पूजा के लिए तैयार होती हैं। लेकिन लाल पाड़ और सफेद जमीन वाली साड़ी ओल्ड एज से लेकर यंग जेनेरेशन तक की खास पसंद है।

लाल पाड़ साड़ी

क्या होती है लाल पाड़ वाली साड़ी?

लाल पाड़ वाली साड़ी में आमतौर पर शरीर का हिस्सा सफेद या ऑफ-व्हाइट होता है और उसके बॉर्डर यानी पाड़ पर लाल रंग का बॉर्डर होता है। बंगाल में इस तरह की साड़ियों के लिए तांत, कॉटन और अलग-अलग तरह के सिल्क का इस्तेमाल किया जाता है।

हल्की तांत साड़ी गर्मी के मौसम के लिए आरामदायक रहती है, जबकि गोरद और सिल्क जैसी साड़ियां पूजा के खास मौकों पर ज्यादा पारंपरिक और फेस्टव लुक देती हैं। 2026 के दुर्गा पूजा फैशन में भी तांत, गोरद, कोरियल और सिल्क की सफेद-लाल साड़ियां फैशन का हिस्सा बनी रहेंगी।

लाल पाड़ साड़ी

सफेद और लाल रंग ही क्यों?

बंगाली पारंपरिक पहनावे में सफेद और लाल का मेल लंबे समय से दिखाई देता है। सफेद रंग को शांति और सादगी से जोड़ा जाता है, जबकि लाल रंग को उत्सव, शक्ति और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इसका अर्थ है मां से है- मां सफेद रंग की तरह शांत है और समय आने पर वे लाल रंग की तरह अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी कर सकती हैं।

दुर्गा पूजा से कैसे जुड़ा यह लुक?

बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को बेटी माना जाता है, जो हर साल अपने मायके आती हैं। दुर्गा पूजा इसी भाव के साथ मनाया जाने वाला बड़ा उत्सव है। बंगाल में लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी इसी सांस्कृतिक माहौल में महिलाओं के पारंपरिक पूजा लुक का हिस्सा बनी रही है।

लाल पाड़ साड़ी

सिंदूर खेला में दिखता है लाल-सफेद लुक

बंगाली दुर्गा पूजा ट्रेडिशन में दशमी के दिन होने वाला सिंदूर खेला इस साड़ी को और खास बनाता है। पारंपरिक रूप से विवाहित बंगाली महिलाएं सफेद साड़ी पर लाल किनारे वाला पहनावा और लाल सिंदूर के साथ दिखाई देती हैं। साड़ी के लाल किनारे और सिंदूर का लाल रंग मिलकर दशमी का पूरा माहौल बनाता है।

आज के फैशन में कैसे बदला इसका लुक?

आज लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी को महिलाएं पारंपरिक तरीके के साथ-साथ मॉडर्न टच के साथ भी पहन रही हैं। लाल ब्लाउज, बड़ी लाल बिंदी, गोल्ड ज्वेलरी, शांखा-पोला और खुले या जूड़े में बंधे बाल बंगाली ट्रेडिशनल लुक का हिस्सा है।

वहीं कुछ महिलाएं इसी साड़ी को सिंपल ब्लाउज, हल्की ज्वेलरी और खुले बालों के साथ पहनकर ज्यादा मिनिमल लुक तैयार करती हैं।

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