NCLAT चेन्नई ने महंगी फीस लेने वाले वरिष्ठ वकीलों की लंबी दलीलों पर जताई नाराजगी।
सुप्रीम कोर्ट में मुकुल रोहतगी ने चेन्नई बेंच की शिकायत का जिक्र किया।
तुषार मेहता ने कहा कि आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं हैं।
Highest Paid Lawyers in India List: देश के महंगे और बड़े वकीलों के अदालत में बहस करने के तरीके को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मोटी फीस लेने वाले कुछ वरिष्ठ वकील अपनी दलीलें लंबी खींचते हैं, जिससे दूसरे मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है और अदालतों को अतिरिक्त समय तक काम करना पड़ता है। मामला पहले नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की चेन्नई बेंच में उठा और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इस दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दिल्ली के वकीलों को लेकर चेन्नई बेंच की नाराजगी का जिक्र किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जजों और सॉलिसिटर जनरल ने भी टिप्पणी की।
गुरुवार को NCLAT की चेन्नई बेंच ने दिल्ली से आने वाले कुछ वरिष्ठ वकीलों की लंबी दलीलों पर नाराजगी जताई थी। बेंच का कहना था कि किसी वकील की वरिष्ठता या उसकी मोटी फीस दूसरे पक्षों के सुनवाई के अधिकार और अदालत के समय पर हावी नहीं हो सकती।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि 'सुपरस्टार' वकील होने या मोटी फीस लेने से किसी को अदालत में ज्यादा समय लेने का विशेष अधिकार नहीं मिल जाता। बेंच ने यह भी नाराजगी जताई कि लंबी बहसों के कारण जजों को शनिवार को भी काम करना पड़ रहा है। उसने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वकीलों की दलीलों के लिए समय सीमा तय की जाएगी।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ से कहा कि चेन्नई बेंच दिल्ली के वकीलों से काफी नाराज है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने सहमति जताते हुए कहा, 'बिल्कुल सही।'
रोहतगी ने बताया कि चेन्नई बेंच की शिकायत है कि ज्यादा फीस लेने वाले 'सुपरस्टार' वकील अदालत के समय के साथ मनमानी करते हैं। उन्होंने बेंच की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें पूछा गया था कि जजों को शनिवार को क्यों काम करना पड़े।
इस बातचीत के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने पूछा कि यह बात किसने कही थी और क्या किसी न्यायिक सदस्य ने ऐसी टिप्पणी की थी। रोहतगी ने इसकी पुष्टि की।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसा कहना चाहिए या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से आरोप गलत नहीं हैं। इसके बाद जस्टिस विनोद चंद्रन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कहने पर इस मामले में उन्होंने भी एक आदेश जारी किया था। अंत में जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'चलो, इसको जाने दो।'
NCLAT की चेन्नई बेंच का कहना था कि कुछ वरिष्ठ वकीलों की लंबी दलीलों के कारण दूसरे वादियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है। इससे अदालत का पूरा शेड्यूल प्रभावित होता है और कई बार जजों को शनिवार को भी सुनवाई करनी पड़ती है।
बेंच ने साफ कहा था कि वकीलों की फीस और उनका पेशेवर कद अदालत के समय पर एकाधिकार का आधार नहीं बन सकता। उसने यह भी संकेत दिया कि आगे से बहस के लिए अधिकतम समय तय किया जा सकता है।
देश के कुछ वरिष्ठ वकीलों की फीस को लेकर मीडिया और कानूनी वेबसाइटों पर अलग-अलग अनुमान प्रकाशित होते रहे हैं। द लॉ एकेडमी की अगस्त में प्रकाशित एक अनुमानित सूची के मुताबिक, कुछ चर्चित वकीलों की प्रति पेशी फीस लाखों रुपये में बताई गई है।
| वकील का नाम | अनुमानित फीस प्रति पेशी |
|---|---|
| हरीश साल्वे | 12 से 15 लाख रुपये, कुछ मामलों में 25 लाख रुपये |
| अभिषेक मनु सिंघवी | 6 से 12 लाख रुपये, कुछ मामलों में 15 लाख रुपये |
| कपिल सिब्बल | 6 से 15 लाख रुपये |
| पी. चिदंबरम | 5 से 15 लाख रुपये |
| सीए सुंदरम | 4.5 से 16.5 लाख रुपये |
| के. पारासरन | 10 से 12 लाख रुपये |
| मुकुल रोहतगी | 6 से 12 लाख रुपये, कुछ मामलों में 20 लाख रुपये |
| केके वेणुगोपाल | 7 से 15 लाख रुपये |
| मेनका गुरुस्वामी | 5 से 10 लाख रुपये |
| गोपाल सुब्रमण्यम | 5.5 से 15 लाख रुपये |