

दिल्ली में SIR के दौरान करीब 47.57 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले से पंजीकृत मतदाताओं से Form-6 भरवाने के बजाय Form-8 या एन्यूमरेशन फॉर्म का विकल्प देने पर सवाल उठाया।
चुनाव आयोग ने सुधारात्मक कदमों और समयसीमा बढ़ाने के सुझाव पर विचार करने की बात कही; दो सप्ताह में जवाब देना है।
Supreme Court on Delhi SIR: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से कई अहम सवाल पूछे। अदालत ने सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में थे, लेकिन SIR के दौरान उनके एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो सके, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए नए मतदाताओं वाला Form-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली में कई लोग काम या अन्य अस्थायी कारणों से अपने पते पर उपलब्ध नहीं हो सके होंगे। ऐसे लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित मानना उचित नहीं है। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि वह इस प्रक्रिया पर विचार करे और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जरूरी कदम उठाए।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कहा कि आयोग अदालत की चिंताओं पर विचार करेगा और समयसीमा बढ़ाने के सुझाव पर भी चर्चा करेगा।
दिल्ली में SIR के दौरान करीब 47.57 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए थे। इनमें से 43 लाख से अधिक लोगों को अनुपस्थित या स्थानांतरित जैसी श्रेणियों में रखे जाने का मुद्दा सुनवाई के दौरान उठा।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, SIR शुरू होने से पहले दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। इनमें से लगभग 97.5 लाख लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए, जबकि करीब 47.57 लाख लोगों के फॉर्म जमा नहीं हो सके।
अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं के नाम पहले से सूची में थे, उन्हें दोबारा नाम शामिल कराने के लिए Form-6 भरने की जरूरत क्यों है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि Form-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से संबंधित घोषणा होती है। पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए यह शर्त उपयुक्त नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जिन मतदाताओं के पते बदल गए हैं या जो अस्थायी रूप से अपने घर पर नहीं मिले, उन्हें Form-8 या एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा सकता।
Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि Form-8 का उपयोग मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में बदलाव या पते के परिवर्तन जैसे मामलों के लिए किया जाता है।
पीठ ने संकेत दिया कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए ऐसी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से नए मतदाता के तौर पर आवेदन न करना पड़े। अदालत ने मतदाता सूची से बाहर रह गए लोगों की सूची सार्वजनिक करने और उन्हें संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क करने का अवसर देने के सुझाव पर भी चर्चा की।
दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सूची में नाम शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि वह समयसीमा बढ़ाने के सुझाव पर विचार करेगा। पीठ ने आयोग से उठाए गए सवालों और प्रक्रिया की समीक्षा कर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा। मामले पर आगे की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
सुनवाई के दौरान ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी तार्किक विसंगति के आधार पर मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया के मानदंडों और नोटिस जारी करने के आधार को स्पष्ट करने की मांग की है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में SIR के दौरान जारी किए गए कुछ नोटिसों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से प्रक्रिया के आधार को स्पष्ट करने और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार करने को कहा था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पहले की टिप्पणियों को Form-6 के किसी बदले हुए प्रारूप को न्यायिक मंजूरी देने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चुनाव आयोग से उठाए गए सवालों पर विचार करने और दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है। आयोग ने भी सुधारात्मक कदमों और समयसीमा बढ़ाने के सुझाव पर विचार करने की बात कही है।
इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल अदालत ने Form-6 को रद्द नहीं किया है और न ही मतदाता सूची में नाम बहाल करने के लिए कोई अंतिम व्यवस्था तय की है।