BJP Spoke Person Shehzad Poonawalla Remark on Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के द्वारा राजनीतिक वंशवाद पर लिख गए लेख के बाद से भयंकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। बता दें कि उन्होंने भारतीय राजनीति में गहरे तक फैले परिवारवाद पर एक तीखा लेख लिखा है। लेकिन इस कहानी में अब बड़ा और नया ट्विस्ट तब आया जब भारतीय जनता पार्टी के नेता और प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने थरूर की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें चेतावनी दी। पूनावाला ने थरूर को 'खतरों के खिलाड़ी' कहते हुए कहा कि वह उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं, क्योंकि 'पहला परिवार बहुत बदला लेने वाला है'।
शशि थरूर ने 'प्रोजेक्ट सिंडिकेट' में 'इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फैमिली बिजनेस' शीर्षक से यह लेख लिखा था। इसमें उन्होंने कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी सहित कई वंशवादी राजनीतिक दलों की आलोचना की और कहा कि भारत को अब योग्यता को अपनाना चाहिए। इसी को लेकर शहजाद पूनावाला ने एक्स पर इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। पूनावाला 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव को 'धांधली' बताकर और राहुल गांधी की आलोचना कर पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे।
पूनावाला ने थरूर को अपना अतीत याद दिलाते हुए लिखा, 'डॉ. थरूर 'खतरों के खिलाड़ी' बन गए हैं। उन्होंने सीधे नेपो किड्स या नेपोटिज्म के नवाबों पर हमला बोला है। सर, जब मैंने 2017 में नेपो नामदार राहुल गांधी को घेरा था, तब आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ था।' शहजाद ने कहा कि वह थरूर के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने थरूर के लेख को बहुत व्यावहारिक बताया और हैरानी जताई कि इतनी स्पष्टवादिता के लिए थरूर को पता नहीं इसके क्या परिणाम भुगतने होंगे।
शशि थरूर के इस लेख के बाद से कांग्रेस पार्टी के भीतर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि नेतृत्व हमेशा योग्यता से आता है। उन्होंने गांधी परिवार का बचाव करते हुए कहा कि क्या भारत में किसी और परिवार ने इतना बलिदान और समर्पण दिया है? यह नया विवाद थरूर के कांग्रेस आलाकमान के साथ पहले से ही ठंडे चल रहे रिश्तों को और खराब कर सकता है।
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थरूर उन 23 नेताओं (G-23) में शामिल थे जिन्होंने 2022 में पार्टी में बड़े सुधारों की मांग की थी। बाद में वह कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव भी लड़े, लेकिन गांधी परिवार के वफादार मल्लिकार्जुन खड़गे से हार गए। हाल के दिनों में उन्होंने आतंकवाद और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे मुद्दों पर सरकार के रुख का समर्थन करके भी पार्टी से अपनी दूरी बढ़ाई है।