शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 को बेंगलुरु में एक कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था
महज तीन साल की उम्र में उन्होंने अपनी असाधारण गणितीय प्रतिभा का परिचय देना शुरू किया था
1980 में लंदन के इंपीरियल कॉलेज में 26 सेकंड में 13 अंकों वाली दो संख्याओं का गुणनफल निकाला
Shakuntala Devi Birth Anniversary: आज ही के दिन यानी 4 नवंबर 1929 को देश की मशहूर गणितज्ञ और 'मानव कंप्यूटर' के नाम से पहचानी जाने वाली शकुंतला देवी का जन्म हुआ था। उन्हें यह उपाधि इसलिए मिली क्योंकि वह गणित की जटिल से जटिल गणनाओं को कुछ ही पलों में अपने दिमाग से हल कर देती थीं। उनकी असाधारण गणना क्षमता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। उनकी जयंती के मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
शकुंतला देवी का जन्म कर्नाटक के बेंगलुरु में एक कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन काफी आर्थिक कठिनाइयों के बीच गुजरा। उनका पालन-पोषण गावीपुरम में हुआ, जो गुट्टाहल्ली का एक झुग्गी-बस्ती वाला इलाका था। उनके पिता सर्कस में काम करते थे और वहां करतब दिखाकर परिवार का गुजारा करते थे। हालांकि, उनकी कमाई इतनी नहीं थी कि परिवार की सभी जरूरतें पूरी हो सकें।
आर्थिक परेशानियों के कारण शकुंतला देवी को औपचारिक शिक्षा हासिल करने का भी पर्याप्त अवसर नहीं मिला। बताया जाता है कि 10 साल की उम्र में उनका दाखिला सेंट थेरेसा कॉन्वेंट, चामराजपेट में पहली कक्षा में कराया गया था। लेकिन उनके पिता स्कूल की फीस भरने में सक्षम नहीं थे। इस वजह से महज तीन महीने बाद ही उनका नाम स्कूल से हटा दिया गया।
शकुंतला देवी की गणना करने की अद्भुत क्षमता बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने संख्याओं के साथ असाधारण समझ का परिचय देना शुरू कर दिया था। एक बार वह अपने पिता के साथ ताश खेल रही थीं। इसी दौरान उन्होंने अपनी गणितीय प्रतिभा दिखाई। उनके पिता ने उनकी इस खास क्षमता को पहचान लिया और उसे आगे बढ़ाने में मदद की।
समय के साथ उनकी प्रतिभा का दायरा बढ़ता गया। मैसूर विश्वविद्यालय और अन्नामलाई विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए उनकी गणना क्षमता लोगों के सामने आई। मैसूर विश्वविद्यालय में जब उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, तब उनकी उम्र सिर्फ छह साल थी। साल 1944 में वह अपने पिता के साथ लंदन चली गईं। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा की चर्चा लंदन के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप तक पहुंचने लगी।
शकुंतला देवी की याददाश्त और गणना करने की क्षमता इतनी शानदार थी कि पिछली सदी की किसी तारीख या दिन के बारे में पूछे जाने पर वह तुरंत जवाब दे देती थीं। उनकी गणना की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई मौकों पर उन्होंने कंप्यूटर को भी पीछे छोड़ दिया।
साल 1977 में अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें 201 का 23वां घात निकालने के लिए कहा गया। उन्होंने बिना कागज और कलम का सहारा लिए महज 50 सेकंड में इसका जवाब दे दिया।
इसके अलावा, 18 जून 1980 को लंदन के इंपीरियल कॉलेज में उन्होंने 13 अंकों वाली दो संख्याओं का गुणनफल केवल 26 सेकंड में निकालकर सबको चौंका दिया था। उनके इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया में उनकी पहचान को और मजबूत किया।
गणित की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली शकुंतला देवी का 21 अप्रैल 2013 को निधन हो गया। उन्होंने बेंगलुरु के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका निधन किडनी से जुड़ी बीमारी के कारण हुआ था।