Parliament Special Session: संसद के मानसून सत्र का औपचारिक तौर पर समापन न करने पर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है। हालांकि, अब उन्हें इसका जवाब मिल जाएगा। ऐसा दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार सितंबर महीने में संसद का एक विशेष सत्र बुला सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे का मकसद परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को संसद की पटल पर रखा जा सकता है।
सरकार पिछले कुछ दिनों से छोटे-छोटे राजीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है। इनमें अकाली दल और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसी पार्टियों के शीर्ष नेता शामिल हैं। इसके साथ ही कैबिनेट में फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि संसद का अगला विशेष सत्र सितंबर के दूसरे हफ्ते में बुलाया जा सकता है। इस मामले पर सरकार के रणनीतिकार गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस मामले पर अभी तक कोई फाइनल निर्णय नहीं लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे दावों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने और कैबिनेट में संभावित बदलाव की अटकलों के बीच संसद सत्र बुलाने के मुद्दे पर सरकार के लेवर पर बातचीत चल रहा है।
सूत्रों के हवाले से ऐसा कहा जा रहा है कि प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे अहम हो सकते हैं। सरकार के रणनीतिकार मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए संसद का सत्र बुलाने के मुद्देद पर चर्चा कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस सत्र के पीछे विपक्षी दलों के रुख में आए बदलाव को अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु में कांग्रेस को टीवीके के साथ जाने से डीएमके के पॉलिटिक्ल स्टैंड में आए बदलाव को सत्ताधारी पार्टी बीजेपी अपने लिए एक अवसर के तौर पर देख रही है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हाल में देखे नरम रुख को भी सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
इसके अलावा पंजाब की अकाली दल के साथ बीजेपी की बढ़ती नजदीकियों को भी संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने की एक बड़ी वजह बताई जा रहा ह। हालांकि, सराकर की ओर से अभी सत्र की तारीख या एजेंडे को लेकर कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
आपको बताते चलें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभी तक संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही को औपचारिक तौर पर समापन नहीं किया है। पार्लियामेंट सेशन के समापन के लिए अंग्रेजी में Prorogue शब्द का उपयोग किया जाता है। जिसका अर्थ है पूरे सत्र की समाप्ति। यानी सरकार ने अभी तक मानसून सत्र को Prorogue करने की घोषणा नहीं की है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 13 अगस्त को सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल (Sine Die) तक स्थगित करने की घोषणा की थी। इसका अर्थ सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना होता है।
इसमें संसद की अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि सत्र खत्म हो गया है। यही तकनीकी चीज है जिसके आधार पर माना जा रहा है कि सरकार ने सदन को Prorogue करने की घोषणा न कर दोनों अहम विधेयकों को पास कराने का रास्ता खुला रखा है।