महात्मा गांधी (Image- Social Media) 
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...जब महात्मा गांधी ने 'अहिंसा' को बनाया आजादी का सबसे शक्तिशाली हथियार, पुण्यतिथि पर पढ़ें बापू की कहानी

Mahatma Gandhi: महात्मा गांधी समझते थे कि अहिंसा कमजोरों का हथियार नहीं है, यह साहसी लोगों की ताकत है। यह घृणा के बिना अन्याय का विरोध करने, क्रूरता के बिना उत्पीड़न का सामना करने की शक्ति है।

अर्पित शुक्ला

Mahatma Gandhi Death Anniversary: भारत की आजादी में महात्मा गांधी के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 30 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की मृत्यु भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसमें उसने अहिंसा, सत्य और एकता के लिए खड़े एक नेता को खो दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा महात्मा गांधी ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समझते थे कि अहिंसा कमजोरों का हथियार नहीं है, यह साहसी लोगों की ताकत है। यह घृणा के बिना अन्याय का विरोध करने, क्रूरता के बिना उत्पीड़न का सामना करने और प्रभुत्व के माध्यम से नहीं, बल्कि सम्मान के माध्यम से शांति स्थापित करने की शक्ति है।

हिंसा सिर्फ एक राजनीतिक साधन नहीं

महात्मा गांधी ने न सिर्फ इन आदर्शों की बात की, बल्कि उन्हें जिया भी था। इस खतरनाक और विभाजित समय में महात्मा गांधी की इस सोच को न सिर्फ याद किया जाना जरूरी है, बल्कि उसके आत्मसात करने की खास जरूरत है। ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी केंद्रीय भूमिका के कारण महात्मा गांधी का अत्यधिक महत्व है। अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने लाखों भारतीयों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों, बहिष्कारों और भूख हड़तालों के माध्यम से स्वतंत्रता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। विशेषकर 1930 के दांडी मार्च ने उत्पीड़न का सामना करने के लिए अहिंसा की शक्ति में उनके विश्वास को दर्शाया। महात्मा गांधी के लिए, अहिंसा सिर्फ एक राजनीतिक साधन नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति थी, जो इस विश्वास पर आधारित थी कि शांति शांतिपूर्ण साधनों से ही हासिल की जा सकती है।

अहिंसा मानव जाति के पास सबसे बड़ी शक्ति

महात्मा गांधी ने कहा था, "अहिंसा मानव जाति के पास सबसे बड़ी शक्ति है। यह विनाश के सबसे शक्तिशाली हथियार से भी अधिक शक्तिशाली है।" यह विश्वास दुनिया भर के आंदोलनों को प्रेरित करता रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नागरिक अधिकारों के संघर्ष से लेकर दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला के रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष तक।

उनके विचारों ने अनगिनत नेताओं और आंदोलनों को प्रभावित किया और प्रतिरोध के साथ ही सुधार के एक शक्तिशाली साधन के रूप में अहिंसा की सार्वभौमिक अपील को रेखांकित किया। उनका दर्शन हमें याद दिलाता है कि शांति एक दूर का आदर्श मात्र नहीं है, बल्कि यह हासिल करने वाला लक्ष्य है। उनकी शिक्षाएं आशा और मेल-मिलाप का एक शाश्वत संदेश देती हैं। -एजेंसी इनपुट के साथ

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