सीपीआई का जंतर मंतर पर प्रदर्शन, फोटो- सोशल मीडिया 
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मादुरो की गिरफ्तारी और वेनेजुएला एयरस्ट्राइक का भारत में विरोध, जंतर-मंतर पर लेफ्ट का 'लाल' विद्रोह

Venezuela Crisis 2026: अमेरिका की वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के खिलाफ भारतीय वामपंथी दलों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर इसे तेल के लिए साम्राज्यवादी हमला करार दिया है।

प्रतीक पाण्डेय

Operation Absolute Resolve: वेनेजुएला में अमेरिका के 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के विरोध में भारत के प्रमुख वामपंथी दल सड़कों पर उतर आए हैं। वामपंथी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए भारत सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

वेनेजुएला की राजधानी कराकास पर 3 जनवरी को हुई भीषण बमबारी और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी सेना द्वारा संचालित इस 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत राष्ट्रपति मादुरो को कथित तौर पर हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया है।

भारत के इन दलों ने किया प्रदर्शन

भारत के प्रमुख वामपंथी संगठनों, जिनमें भाकपा (माले) लिबरेशन, सीपीआई (एम), सीपीआई, आरएसपी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल हैं, ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस कार्रवाई को 'आपराधिक युद्ध' और एक संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता पर खुला हमला बताया है। वामपंथी नेताओं ने इस पूरी घटना को निर्वाचित राष्ट्रपति का 'अपहरण' करार दिया है और आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर की धज्जियां उड़ा दी हैं।

जंतर-मंतर पर गूंजा 'NO Blood for OIL' का नारा

इस सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न लेफ्ट संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में मौजूद पोस्टरों और बैनरों पर 'वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला नहीं सहेंगे', 'NO blood for OIL' और 'वैश्विक शांति के दुश्मन अमेरिका और साम्राज्यवाद का गठजोड़ मुर्दाबाद' जैसे तीखे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट तर्क था कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय नियमों के पूरी तरह खिलाफ है और इससे विश्व शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। लेफ़्ट नेता राजीव कुंवर ने इस बात पर गहरी निराशा जताई कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी भारत सरकार ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।

'नार्को-टेररिज्म' महज एक बहाना, असली निशाना तेल भंडार

वामपंथी दलों ने अमेरिकी दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा लगाया गया 'ड्रग्स तस्करी' या 'नार्को-टेररिज्म' का आरोप केवल एक पर्दा है। सीपीआई के नेशनल सेक्रेटरी डॉक्टर गिरीश चंद्र शर्मा और अन्य नेताओं का आरोप है कि अमेरिका की असली मंशा वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर कब्जा करना और वहां की 'बोलिवेरियन क्रांति' को कुचलना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका एक बार फिर लैटिन अमेरिका को अपना 'बैकयार्ड' समझकर वहां की चुनी हुई सरकारों को उखाड़ फेंकने की पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता दिखा रहा है। वामपंथियों ने इसे इराक युद्ध की पुनरावृत्ति बताया, जहां संसाधनों की लूट के लिए तबाही मचाई गई थी।

देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

भाकपा (माले) के दीपंकर भट्टाचार्य, डी राजा और एमए बेबी जैसे दिग्गज नेताओं ने देश भर के शांति-प्रिय नागरिकों से इस 'अंतरराष्ट्रीय गुंडागर्दी' के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की है। उनका कहना है कि यह जंग केवल वेनेजुएला के खिलाफ नहीं, बल्कि उन सभी देशों के खिलाफ है जो अपने राजनीतिक और आर्थिक भविष्य का फैसला खुद करना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने आगाह किया कि अगर आज अमेरिका की इस तानाशाही को नहीं रोका गया, तो भविष्य में किसी भी अन्य संप्रभु राष्ट्र को इसी तरह निशाना बनाया जा सकता है। आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में अमेरिकी दूतावासों और सरकारी कार्यालयों के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है।

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