जयराम रमेश (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
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'चुनाव आयोग पूरी तरह कॉम्प्रमाइज्ड', CEC ज्ञानेश कुमार पर जयराम रमेश का हमला; एग्जिट पोल को बताया रैकेट

Jairam Ramesh Statement On Voting Rights: जयराम रमेश ने बताया कि नोटिस में 9 आरोप हैं। जब तक वह पद से हटाए नहीं जाते, नोटिस लाते रहेंगे। मतदान देने के अधिकार पर बोले अब यह संकट में है।

अमन मौर्या

Jairam Ramesh Statement On Exit Poll: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरूवार को एक बार फिर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने एक केंद्र शासित प्रदेश सहित 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल को भी नकार दिया। उन्होंने पूरे एग्जिट पोल को रैकेट करार दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कॉम्प्रमाइज्ड है। ऐसा ज्ञनेश कुमार के कार्यकाल में पहली बार हुआ।

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की बात पर उन्होंने बताया कि नोटिस में 9 आरोप हैं। जब तक वह पद से हटाए नहीं जाते, नोटिस लाते रहेंगे। साथ ही देश में मतदान देने को लेकर कहा कि मतदान देने का अधिकार अब खतरे में है।

परिसीमन जबरन लागू करने की कोशिश

इसके पहले 28 अप्रैल को अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट करते हुए जयराम रमेश ने लिखा था कि अब जबकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और लोकसभा के खतरनाक परिसीमन को जबरन लागू करने की उनकी चालाकी भरी कोशिश विपक्ष की एकजुटता और सामूहिकता के कारण बुरी तरह विफल हो गई है, अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री वही करें, जिसकी मांग विपक्ष मार्च 2026 के मध्य से एकजुट होकर लगातार करता आ रहा है।

आगे लिखा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (जिसे 16 अप्रैल 2026 की देर रात घबराहट में अधिसूचित किया गया) को 2029 से लोकसभा की मौजूदा संख्या के साथ कैसे लागू किया जा सकता है, इस पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। यह संभव है। यह वांछनीय है। यह आवश्यक है।

73 सांसदों ने दिया नोटिस

इसके पहले 24 अप्रैल को पोस्ट में लिखा, राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने अभी-अभी अपने सेक्रेटरी जनरल को भारत के राष्ट्रपति को संबोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए एक नया नोटिस ऑफ मोशन सौंपा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का आग्रह किया गया है। यह मांग 15 मार्च 2026 को और उसके बाद उनके द्वारा किए गए कृत्यों और गलतियों के आधार पर सिद्ध दुराचार के आधार पर की गई है।

यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) को अनुच्छेद 124(4) के साथ पढ़ते हुए, साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) तथा न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अंतर्गत आता है।

CEC के खिलाफ 9 विशिष्ट आरोप

अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नौ विशिष्ट आरोप हैं, जिन्हें बेहद विस्तार से दर्ज किया गया है और जिन्हें न तो नकारा जा सकता है और न ही दबाया जा सकता है। उनका पद पर बने रहना संविधान पर एक हमला है। यह पूरी तरह शर्मनाक है कि वह व्यक्ति अब भी पद पर बना हुआ है, ताकि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारों पर काम कर सके।

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