भारतीय वॉरशिप्स, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
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VIDEO: दुश्मनों की नींद उड़ाने आई INS हिमगिरी-उदयगिरी, जानें क्यों इतनी घातक हैं ये वॉरशिप्स

Himgiri Udayagiri Warships: भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमता को और मज़बूत करने के लिए कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय नौसेना को आज दो नए युद्धपोत मिलने वाले हैं।

अमन उपाध्याय

Indian Navy Warships: आज भारतीय नौसेना को समुद्र की सुरक्षा के लिए दो नए शक्तिशाली सहयोगी मिलने जा रहे हैं INS उदयगिरी और INS हिमगिरी। दोनों युद्धपोत आज दोपहर 2:45 बजे औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे। यह एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि पहली बार दो अलग-अलग भारतीय शिपयार्ड में बने युद्धपोत एक साथ नौसेना में कमीशन हो रहे हैं।

इन दोनों के जुड़ने से भारत के पास तीन-फ्रिगेट स्क्वाड्रन तैयार हो जाएंगे, जो स्वदेशी क्षमता, तकनीकी प्रगति और औद्योगिक ताकत का शानदार उदाहरण पेश करेंगे। INS उदयगिरी, जो नीलगिरी क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट है, 1 जुलाई को नौसेना को सौंपा गया था, वहीं एडवांस प्रोजेक्ट-17A के तहत बना स्टेल्थ फ्रिगेट INS हिमगिरी 31 जुलाई को सौंपा गया। अब ये दोनों युद्धपोत भारतीय नौसेना की ताकत और भी अधिक बढ़ाने जा रहे हैं।

आसानी से नहीं आएगी राडार की पकड़ में

भारत के स्वदेशी युद्धपोत INS उदयगिरी और INS हिमगिरी देश की समुद्री ताकत को और मजबूत बनाने वाले हैं। INS उदयगिरि का निर्माण मझगांव डॉकयार्ड में जबकि INS हिमगिरि कोलकाता शिपयार्ड में किया गया है। इन जहाजों को खास मटीरियल से बनाया गया है, जिससे ये आसानी से राडार की पकड़ में नहीं आते।

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क्यों घातक है ये वॉरशिप्स?

इनकी लंबाई 149 मीटर और वजन करीब 6,670 टन है। आकार की बात करें तो ये लगभग 15 मंजिला इमारत जितने ऊंचे हैं। 52 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले ये पोत एक बार ईंधन भरने के बाद 10,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं। इन पर सी किंग हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जो पनडुब्बियों और सतही जहाजों को खोजने और नष्ट करने में सक्षम हैं। साथ ही ये पोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस होंगे, जो 290 किलोमीटर दूर तक समुद्र और ज़मीन पर स्थित लक्ष्यों को भेद सकती है।

करीब से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को गिराने की क्षमता के साथ-साथ इनमें आधुनिक सोनार सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे गहरे पानी में छिपी पनडुब्बियों का पता लगाया जा सके। इनकी तैनाती से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में पाकिस्तान व चीन की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा सकेगी। इन युद्धपोतों के निर्माण में 200 से अधिक MSME कंपनियों की भागीदारी रही, जिससे लगभग 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला।

विशेष रूप से किया गया तैयार

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ये दोनों जहाज प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित किए गए हैं। इन्हें विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि वे दुश्मन के रडार, इंफ्रारेड और ध्वनि सेंसर से आसानी से बच सकें। इनकी तैनाती से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की नौसैनिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

INS हिमगिरि का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है। इसका नाम पुराने INS हिमगिरि से प्रेरित है। वहीं INS उदयगिरि का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने किया है। यह आंध्र प्रदेश की उदयगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है और महज 37 महीनों में तैयार हुआ है।

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