पु‍त‍िन के सलाहकार से मिले अज‍ित डोभाल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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जयशंकर रूस...तो पुतिन के करीबी से भारत में मिले NSA अजीत डोभाल, अमेरिका से पाकिस्तान तक मचा हड़कंप

Putin India Visit: भारत-रूस संबंधों में सक्रियता बढ़ी है। जयशंकर मॉस्को में लावरोव से मिले। पुतिन के सलाहकार पत्रुशेव भारत आए। सुरक्षा, ऊर्जा, डिफेंस और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई।

अक्षय साहू

India Russia Relations: भारत-रूस संबंधों में इन दिनों असामान्य रूप से तेज़ गतिविधि देखी जा रही है। एक ओर विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस के दौरे पर हैं और मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से विस्तृत वार्ता कर रहे हैं। दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाय पत्रुशेव अचानक भारत पहुँचे और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से लंबी बैठक की।

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील, गैस कॉन्ट्रैक्ट और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत चरम पर है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह सामान्य कूटनीति है या किसी बड़े रणनीतिक कदम की तैयारी। पत्रुशेव की भारत यात्रा को साधारण दौरा नहीं माना जा रहा। वे पुतिन के बहुत करीबी हैं और रूस की सुरक्षा तथा विदेश नीति के अहम फैसलों में शामिल रहते हैं।

विभिन्न मुद्दों पर हुई बातचीत

पुतिन की संभावित भारत यात्रा से कुछ दिन पहले उनका डोभाल से मिलना इस बात का संकेत है कि रूस चाहता है कि दौरे से पहले सभी मुद्दों पर स्पष्टता और तालमेल सुनिश्चित किया जाए। बताया जा रहा है कि इस बैठक में सुरक्षा सहयोग, रणनीतिक समन्वय, डिफेंस प्रोजेक्ट और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

वहीं दूसरी तरफ मॉस्को में जयशंकर और लावरोव के बीच हुई वार्ता का मुख्य केंद्र भी पुतिन की आगामी भारत यात्रा और 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारियाँ रहीं। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते अंतिम चरण में हैं और यह मुलाकात द्विपक्षीय साझेदारी में नई गति लाएगी। बातचीत में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट और अफगानिस्तान की स्थिति पर भी खुलकर चर्चा हुई। भारत ने दोहराया कि वह संघर्ष विराम और स्थायी समाधान का समर्थक है और सभी पक्षों से रचनात्मक भूमिका की अपेक्षा करता है।

साल के अंत में भारत आएंगे पुतिन

पुतिन की यात्रा 5 दिसंबर के आसपास हो सकती है, जो 2021 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। यह यूक्रेन युद्ध के बीच उनके दुर्लभ विदेश दौरों में से एक है, इसलिए इसका प्रतीकात्मक महत्व भी काफी है। इस दौरान ऊर्जा और गैस पर नए करार, रक्षा सहयोग और को-प्रोडक्शन के समझौते तथा रुपए-रूबल लेनदेन पर महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है।

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