भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया। इमेज-एआई 
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कैसे होता है भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव? कौन बन सकता है उम्मीदवार? प्रक्रिया और पूरा नियम जान लें

BJP National President: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे है होता? इसमें कौन लोग वोट डालते हैं? इस पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है, इस प्रक्रिया की जड़ें पार्टी के संविधान में कहां तक जाती हैं

रंजन कुमार

BJP President Election: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय कार्यालय में खासी हलचल है। आज राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल होगा। कल नए अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा होगी। सूत्रों के अनुसार पार्टी के मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की दहलीज पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके प्रस्तावक होंगे।

यह सवाल स्वाभाविक है कि भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है? इसमें वोटिंग होती है? वोट कौन डालते हैं? चुनाव आयोग की भूमिका होती है क्या? क्या यह औपचारिक प्रक्रिया है या संगठित लोकतांत्रिक ढांचा?

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत-संगठन

दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा की असली ताकत इसका संगठनात्मक ढांचा है। पार्टी का दावा है कि उसके पास 18 करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्य हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव आम कार्यकर्ता सीधे नहीं लड़ता और न जनता वोट डालती है। यह पूरी तरह आंतरिक, संगठनात्मक प्रक्रिया है। इसमें चुनाव आयोग की भूमिका नहीं होती। यह पार्टी का निजी मामला है। ठीक वैसे जैसे किसी क्लब या सोसाइटी का अध्यक्ष चुना जाता है।

कहां से शुरू होती है चुनावी प्रक्रिया?

भाजपा के संविधान में बहुत स्पष्ट है कि संगठनात्मक चुनाव बूथ या स्थानीय स्तर से शुरू होते हैं। धारा-7 में संगठनात्मक ढांचा है। ग्राम केंद्र/ शहरी केंद्र, स्थानीय समिति, मंडल, जिला, प्रदेश और फिर राष्ट्रीय स्तर। सबसे पहले सदस्यता अभियान चलया जाता है। 18 साल से ऊपर का भारतीय नागरिक, जो पार्टी के उद्देश्य (धारा-2), मूल दर्शन और निष्ठाओं को स्वीकार करे, वो प्राथमिक सदस्य बन सकता है। सदस्यता छह साल के लिए होती है। नवीनीकरण जरूरी है। उसके बाद सक्रिय सदस्य बनने की प्रक्रिया है। सक्रिय सदस्य वही होता है, जिसने न्यूनतम 3 साल पार्टी में काम किया हो। पार्टी कोष में 100 रुपए जमा किए हों। आंदोलनों में हिस्सा लिया हो। पार्टी पत्रिका का ग्राहक हो। सिर्फ सक्रिय सदस्य ऊपरी स्तर के चुनाव लड़ या वोट डाल सकते हैं।

स्थानीय समिति से होती है चुनाव की शुरुआत

स्थानीय समिति से चुनाव की शुरुआत होती है। एक स्थानीय समिति में न्यूनतम 25 सदस्य जरूरी हैं। सदस्यों की संख्या के आधार पर समिति की श्रेणी तय होती है। उसी आधार पर अध्यक्ष और सदस्यों की संख्या। फिर मंडल समिति, जिला समिति, प्रदेश परिषद एवं कार्यकारिणी और अंत में राष्ट्रीय परिषद का गठन होता है। यह पूरी प्रक्रिया संगठन पर्व नाम से जानी जाती है। ये हर 6 साल में होती है। वर्तमान संगठन पर्व 2024-25 में शुरू हुआ। इसका अंतिम चरण चल रहा है।

राष्ट्रीय परिषद और निर्वाचक मंडल

पार्टी के संविधान की धारा-19 के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होता है। यह धारा कहती है कि चुनाव विशेष निर्वाचक मंडल द्वारा होगा।

कौन लड़ सकता है चुनाव?

भाजपा के पार्टी संविधान की धारा-19(3) के मुताबिक उम्मीदवार को न्यूनतम 15 साल प्राथमिक सदस्य और न्यूनतम चार कार्यकाल (12 साल) सक्रिय सदस्य रहना जरूरी है। नामांकन के लिए निर्वाचक मंडल के न्यूनतम 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्ताव जरूरी है। यह प्रस्ताव न्यूनतम 5 अलग-अलग राज्यों (जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव हो गए हों) से आना चाहिए। प्रत्याशियों की लिखित सहमति अनिवार्य है।

नामांकन, जांच और मतदान प्रक्रिया

  • 16 जनवरी: निर्वाचक मंडल की लिस्ट जारी हुई।
  • 19 जनवरी (दोपहर 2 से 4 बजे): नामांकन दाखिल प्रक्रिया।
  • इसी दिन शाम 4 से 5 बजे: नामांकन पत्रों की जांच होगी।
  • शाम 5-6 बजे तक: नाम वापस ले सकते हैं।

दोपहर 1:30 तक होगा गुप्त मतदान

एक से अधिक वैध उम्मीदवार बचे तो 20 जनवरी की सुबह 11:30 से दोपहर 1:30 बजे तक गुप्त मतदान। इसी दिन नतीजे आएंगे। सिर्फ एक वैध नामांकन रह जाए तो उसे निर्विरोध घोषित किया जाता है।

सर्वसम्मति की परंपरा

भाजपा के 45 साल के इतिहास में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए गुप्त मतदान नहीं हुआ। हमेशा सर्वसम्मति बनी। पार्टी में ऊपर से नीचे तक सहमति बनाने की मजबूत संस्कृति है। इस सहमति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अनौपचारिक, लेकिन अहम भूमिका रहती है।

पार्टी संविधान में RSS का जिक्र नहीं

पार्टी संविधान में RSS का जिक्र नहीं है। मगर, व्यवहार में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और भाजपा के शीर्ष नेता (खासकर पीएम और गृह मंत्री) मिलकर नाम तय करते हैं। संगठन महामंत्री इस प्रक्रिया में अहम सेतु की भूमिका निभाते हैं। यह सर्वसम्मति जरूरी है, क्योंकि अध्यक्ष का पद सिर्फ औपचारिक नहीं होता। वह संगठन की दिशा तय करता है। चुनावी रणनीति बनाता है। सरकार के साथ तालमेल रखता है। टकराव पार्टी को कमजोर कर सकता है।

कार्यकाल

भाजपा के पार्टी संविधान की धारा-21 के मुताबिक कोई व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रह सकता है। मतलब अधिकतम छह साल। उसके बाद ब्रेक जरूरी है। वैसे, हाल के वर्षों में एक्सटेंशन की परंपरा बन गई है। जेपी नड्डा जनवरी 2020 में अध्यक्ष बने। जनवरी 2023 में कार्यकाल खत्म हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भी उन्हें एक्सटेंशन मिलता रहा। अब 2026 में नया अध्यक्ष आ रहा।

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