Gen-Z Trending Slang In Parliament: इन दिनों संसद का मानसून सत्र चल रहा है, जिसकी 20 जुलाई से शुरूआत हुई थी और 13 अगस्त तक प्रस्तावित है। संसद की कार्यवाही की दौरान लोकसभा में जेन-जी के ट्रेंडिंग स्लैंग खूब गूंज रहे हैं। इन स्लैंग को सत्ता और विपक्षी सांसदों के द्वारा एक-दूसरे पर हमले के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल, हाल ही में नीट पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इन शब्दों को काफी प्रमुखता से इस्तेमाल किया था, जो अब संसद तक पहुंच चुका है।
मंगलवार को संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सांसदों ने अपने भाषणाों में जेन- जी के ट्रेंडिंग स्लैंग को इस्तेमाल किया। कई सांसदों ने युवाओं को आकर्शित करने के लिए उनकी ही भाषा में जवाब देते हुए नजर आए। इस दौरान वे वास्तेगुने हुईंया, Delulu और FOMO जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। तब संसद में मौजूद सदस्यों को मुस्कुराते हुए देखा गया। आइए जानते हैं उन ट्रेडिंग शब्दों के बारे में जिन्हें सांसदों द्वारा इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा हम उन शब्दों का मतलब भी समझने की कोशिश करेंगे।
संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने भी जेन-जी के ट्रैडिंग शब्दों का इस्तेमाल किया। सरकार के पक्ष में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पॉलिसी वैक्यूम पैदा की। लेकिन, एनडीए सरकार ने एनटीए जैसी संस्था का गठन किया। वहीं, अगर मैं जेन-जी की भाषा का में कहूं तो मोदी जी ने 'Clocked it' किया और सही समाधान निकाला।
वहीं, एंटी पेपर लीक विधेयक पर संसद में बोलते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर निशाना साधा। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि कि विपक्ष को लगता है कि युवा उनके साथ हैं, लेकिन इससे बड़ा कोई 'Delulu' नहीं हो सकता।
संसद की कार्यवाही के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने भी जेन-जी के ट्रेडिंग स्लैंग का खूब इस्तेमाल किया। अपने भाषण में शिवसेना सांसद ने कहा कि मैं विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को Gen-Z की भाषा में समझाता हूं। पहले 37 दिनों तक वे जंतर-मंतर नहीं गए, तो उन्हें MIA हो गया। फिर उन्हें FOMO हुआ और इसीलिए वे प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। आखिर में उनको Delulu हुआ, उन्हें लगा कि प्रदर्शनकारी छात्र उनके साथ आएंगे, लेकिन कोई नहीं आया।
पक्ष और विपक्ष जेन-जी के ट्रेडिंग शब्दों के जरिए एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रह थे। इसी बीच कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी जेन-जी में मशहूर स्लैंग का इस्तेमाल किया। युवा प्रदर्शनकारियों का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनके हाथ में पत्थर नहीं था, संविधान था। किसी ने रील बनाई, किसी ने मीम बनाया, किसी ने गीत गाया। वो वास्तेगुने हुईंया भी कहते थे। वो इतने प्यार से इस्तीफा मांगते थे, कहते थे कुचु पुचु इस्तीफा दे दो। उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकार की नाकामी की वजह से सड़कों पर आना पड़ा।
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इस बीच बहस में लगातार इस्तेमाल हो रहे जेन-जी स्लैंग पर एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सभी सांसदों को मुद्दे की गंभीरता याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आप भी Delulu में मत रहो कि युवा आपके साथ हैं। सुप्रिया सुले ने कहा कि हम जेन-जी की भाषा में क्यों उलझ रहे हैं? यह बहस ऑक्सफोर्ड ऑनलाइन डिक्शनरी की प्रतियोगिता नहीं है कि किसे कितने नए शब्द आते हैं। हम यहां देश के छात्रों से जुड़े एक बेहद गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।