Chirag Paswan on CEC Gyanesh Kumar: मोदी सरकार में मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों पर बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि अगर चुनाव आयोग पर इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मेरा मानना है कि चुनाव आयोग, और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि वे अपना पक्ष मजबूती से सामने रखें।
चिराग पासवान ने आगे कहा कि मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि विपक्ष क्या कहता है, क्योंकि राजनीति करना उनका काम है। चिराग ने कहा कि चुनाव आयोग को लोगों का भरोसा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि अगर चुनावी प्रक्रिया को लेकर ही जनता के मन में शक पैदा होगा, तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसे में, चुनाव आयोग को अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए जिससे लोगों के मन में कोई शक न रहे।
बिहार में जमुई, समस्तीपुर और फिर बांका में छात्रा के साथ खुलेआम सड़क पर हैवानियत की घटनाओं ने शर्मसार कर दिया है। विपक्षी दल इसको लेकर लगातार राज्य सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं। इन घोटनाओं पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गहरी चिंता जताई और इन घटनाओं को शर्मनाक बताया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत चिंता की बात है कि हमारी सरकार के सत्ता में रहते हुए भी अपराधी ऐसे काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में हम लोग जबावदेही से नहीं भाग सकते हैं। हम सही कार्रवाई किए बिना इनको जाने नहीं दे सकते। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की बात कही।
हाल में प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, SIR से जुड़े मामलों और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे विषयों पर केंद्रित थीं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ निर्णयों और आदेशों पर असहमति जताते हुए कहा कि कुछ मामलों में उन्हें न तो जानकारी दी गई और न ही उनसे परामर्श किया गया। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कुछ प्रक्रियागत पहलुओं पर भी सवाल उठाए।
लेकिन इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्णय प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग मतों का सामने आना स्वाभाविक है और आयोग के हर निर्णय को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया गया है। आयोग ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में उसके सभी निर्णय सर्वसम्मति से किए गए हैं।