Gujarat Chandipura Virus Death Toll: गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर जारी है। चांदीपुरा वायरल से मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। शुक्रवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य में चांदीपुरा वायरस के 42 मामले सामने आए हैं, जिनसे 28 लोगों की मौत हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून को मौजूदा निगरानी अवधि शुरू होने के बाद से राज्य में 324 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 42 मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है, जबकि 10 सैंपल की लैब रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
हालांकि, इस वायरस के कारण 28 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके आधार पर, दर्ज किए गए मामलों में मृत्यु दर लगभग 66.7 प्रतिशत है।
ये ताजा आंकड़े इस महीने की शुरुआत में दर्ज किए गए आंकड़ों से ज्यादा हैं। 14 अगस्त को गुजरात में 257 संदिग्ध मामले थे, जिनमें 41 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी और 27 मौतें हुई थीं।
21 जुलाई को राज्य में 63 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 12 मामलों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी और घरों व पशुओं के बाड़ों के आस-पास संक्रमण फैलाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए।
चांदीपुरा वायरस से होने वाला संक्रमण 'एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम' (AES) से जुड़ा है और यह मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेत की मक्खी) के जरिए फैलता है। इसके प्रकोप आमतौर पर मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में देखे जाते हैं।
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अनुसार, इस वायरस के कारण अचानक तेज बुखार और न्यूरोलॉजिकल लक्षण (दिमाग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं) हो सकते हैं। 15 साल से कम उम्र के बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आने के लिए ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रहा है और संक्रमण को रोकने के उपाय लागू कर रहा है। इन प्रयासों में घर-घर जाकर जांच करना और सैंडफ्लाई की आबादी को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाना शामिल है।