विधु विनोद चोपड़ा (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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FTII में पढ़ने के लिए नहीं थे पैसे, टॉप कर जीती स्कॉलरशिप, ऐसे फिल्मकार बने विधु विनोद चोपड़ा

Vidhu Vinod Chopra Career: विधु विनोद चोपड़ा ने फिल्मकार बनने के लिए काफी संघर्ष किया। जब उन्होंने पिता से फिल्में बनाने की बात कही तो उन्हें थप्पड़ पड़ा और पिता ने कहा कि फिल्म बनाकर भूखे मरोगे।

सोनाली झा

Vidhu Vinod Chopra Birthday Special: विधु विनोद चोपड़ा ने परिंदा, 1942: ए लव स्टोरी, मिशन कश्मीर, मुन्नाभाई एमबीबीएस, 3 इडियट्स और 12वीं फेल जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। फिल्मकार बनने का सपना देखने पर उन्हें अपने पिता की नाराजगी तक झेलनी पड़ी थी।

विधु विनोद चोपड़ा का जन्म 5 सितंबर 1952 को श्रीनगर में हुआ था। उनका बचपन कश्मीर में बीता। इसके बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया यानी एफटीआईआई से फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की। एक इंटरव्यू में चोपड़ा ने अपने संघर्ष के दिनों का किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया था कि जब उन्होंने अपने पिता से कहा कि वह फिल्में बनाना चाहते हैं, तो पिता ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था। उन्होंने कहा था कि फिल्में बनाकर वह भूखे मर जाएंगे और मुंबई में कैसे रहेंगे।

नेशनल स्कॉलरशिप के जरिए एफटीआईआई पहुंचे

विधु विनोद चोपड़ा के परिवार के पास उन्हें फिल्म स्कूल भेजने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने नेशनल स्कॉलरशिप हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की और कश्मीर यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स ऑनर्स में टॉप किया। इसके बाद स्कॉलरशिप से मिले पैसों की मदद से उन्होंने एफटीआईआई में दाखिला लिया। यहीं उन्होंने ‘मर्डर एट मंकी हिल’ नाम की शॉर्ट फिल्म बनाई, जिसे नेशनल अवॉर्ड मिला।

विधु विनोद चोपड़ा

ऑस्कर नॉमिनेशन पर पिता ने किया सवाल

इसके बाद चोपड़ा ने एन एनकाउंटर विद फेसेस नाम की डॉक्यूमेंट्री बनाई, जो गरीब और बेसहारा बच्चों की जिंदगी पर आधारित थी। साल 1979 में यह डॉक्यूमेंट्री ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई। जब चोपड़ा ने यह खबर अपने पिता को बताई तो वह बेहद खुश हुए और उन्हें गले लगा लिया। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने पूछा कि इससे पैसे कितने मिलेंगे? जब चोपड़ा ने बताया कि नॉमिनेशन के लिए कोई पैसा नहीं मिलेगा, तो यह किस्सा उनके पिता की आर्थिक चिंता को भी दिखाता है।

परिंदा से मिली अलग पहचान

विधु विनोद चोपड़ा ने आगे सजाए मौत और खामोश जैसी फिल्में बनाईं। साल 1989 में आई परिंदा ने उनके निर्देशन को नई पहचान दी। बतौर निर्माता उन्होंने मुन्नाभाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्नाभाई, 3 इडियट्स, पीके और संजू जैसी सफल फिल्मों से अपनी पहचान बनाई। 2020 में उन्होंने शिकारा और 2023 में 12वीं फेल जैसी फिल्में दीं। आज विधु विनोद चोपड़ा की गिनती हिंदी सिनेमा के चर्चित और सफल फिल्मकारों में होती है।

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