Emraan Hashmi and Yami Gautam Film Haq: इमरान हाशमी और यामी गौतम की फिल्म हक 7 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। रिलीज होते ही फिल्म ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। सुपर्ण वर्मा निर्देशित इस फिल्म में इमरान हाशमी और यामी गौतम धर ने लीड रोल निभाया है। यह एक पावरफुल कोर्टरूम ड्रामा है, जो आस्था, न्याय और समानता जैसे अहम मुद्दों को मजबूती से उठाता है।
हक के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है और ज्यादातर लोगों ने इसे मस्ट वॉच फिल्म बताया है। हक को देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी खूब सराहना मिल रही है। जंगली पिक्चर्स, इनसोम्निया फिल्म्स और बावेजा स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म ने लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। दर्शक कह रहे हैं कि यह फिल्म तीन तलाक, समान नागरिक संहिता और जेंडर जस्टिस जैसे टॉपिक्स पर एक नई बहस छेड़ती है।
एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि हक जोरदार प्रहार करती है, एक रॉ, थॉट प्रवोकिंग कोर्ट रूम ड्रामा जो हमारे समाज पर हावी पाखंड और अंधविश्वास की धज्जियां उड़ाती है। यह साहसी, भावुक और बेहद ईमानदार है। यामी गौतम एक ऐसा रिविलेशन हैं जो निडर और हर फ्रेम पर पूरी तरह से छा जाती हैं। दूसरे यूजर ने लिखा कि यामी गौतम ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ अदाकारी में से एक दी है। उग्र, निडर और दृढ़ विश्वास से भरपूर उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस पूरे समय ध्यान खींचती है। इमरान हाशमी, एक शांत लेकिन दमदार भूमिका में, कहानी में गहराई और संतुलन जोड़ते हैं, यामी की तीव्रता को बखूबी पूरा करते हैं।
खुद को फिल्म क्रिटिक बताने वाले केआरके ने भी फिल्म की तारीफ करते हुए लिखा कि फिल्म हक हर मुस्लिम महिला को देखनी चाहिए। यामी गौतम का काम शानदार है। निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने साहसिक विषय को बड़े बेबाक तरीके से दिखाया है। हां, इमरान हाशमी की विग थोड़ी गड़बड़ है, लेकिन उनका इमोशनल परफॉर्मेंस शानदार है। वर्तिका सिंह ने भी बेहतरीन अभिनय किया है।
‘हक’ की कहानी असल जीवन के शाह बानो केस से प्रेरित है, जिसने भारत के कानूनी इतिहास में एक नई बहस छेड़ी थी। फिल्म में यामी गौतम (शाज़िया बानो) एक ऐसी महिला का किरदार निभा रही हैं, जिसे उसका पति इमरान हाशमी (अब्बास खान) तलाक देकर छोड़ देता है। जब वह अपने हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाती है, तो उसका संघर्ष पूरे समाज की आवाज बन जाता है। फिल्म इस बात पर जोर देती है कि कानून के सामने सब बराबर हैं, चाहे धर्म या जेंडर कुछ भी हो।