West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना से पहले कोलकाता में गुरुवार (30, अप्रैल) को टीएमसी कार्यकर्ता ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हंगामा किया। TMC नेता शशि पांजा और कुणाल घोष के स्ट्रॉन्ग रूम के सामने धरने पर बैठ गए, जिसके बाद ममता बनर्जी भी वहां पहुंची और आक्रोश देखते-ही-देखते बढ़ गया। इस मामले में मुख्य चुनाव अधिकारी का बयान सामने आया।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया, कोई भी CCTV बंद नहीं किया गया था। वहां मौजूद सभी 8 स्ट्रॉन्ग रूम - 7 EVM के और 1 पोस्टल बैलेट का CCTV फुटेज दिखाया जा रहा है। राजनीतिक पार्टियों के लोग तीन-स्तरीय सुरक्षा के बाहर बैठकर इसे देख सकते हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि उन्होंने शाम करीब 4 बजे कुछ हलचल देखी, जब हमारे कर्मचारी नियमों के अनुसार पोस्टल बैलेट रूम खोल रहे थे। नियम के अनुसार, सभी राजनीतिक पार्टियों को और सभी उम्मीदवारों को RO (रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा सूचित किया गया था। उन्हें वहां आना चाहिए था। शाम 4 बजे के बाद, 3 उम्मीदवार आए थे और उन्होंने सब कुछ देखा कि EVM के स्ट्रॉन्ग रूम सील थे, जबकि पोस्टल बैलेट का स्ट्रॉन्ग रूम खुला था। इसके बाद वे तीनों चले गए।
कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा, कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति खराब नहीं होगी। ऐसी बातें होती रहती हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक है। मतगणना 100% निष्पक्ष और साफ-सुथरी होगी, ठीक वैसे ही जैसे चुनाव हुए थे।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया, रिट याचिका खारिज कर दी गई है। हमें इसकी एक प्रति मिल गई है। कोई भी राजनीतिक पार्टी यह तय नहीं कर सकती कि किसे शामिल किया जाना है और किसे नहीं। यह रिटर्निंग ऑफिसर का विवेक है; वह मतगणना या पूरी चुनाव प्रक्रिया में जिसे चाहें शामिल कर सकते हैं।
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दोबारा मतदान के सवाल पर, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल बोले, 77 बूथों से शिकायतें मिली हैं। पहली नज़र में, हमें लगा कि इनमें से 23 बूथों के लिए शिकायतें सही हो सकती हैं। अभी इनकी जांच (scrutiny) की जानी है। राज्य पर्यवेक्षक की रिपोर्ट सुबह आएगी। तभी हम निश्चित रूप से कुछ कह पाएंगे।
TMC के इस दावे पर कि हावड़ा में केंद्रीय बलों के हमले के बाद एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा, यह 82 साल के एक बुज़ुर्ग थे जो अपने बेटे के साथ वोट डालने आए थे। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने बूथ पर जाकर वोट डालने की ज़िद की। वह बूथ के अंदर गए और EVM तक चलकर गए। वोट डालने के बाद जब वह बाहर आए, तो वह गिर पड़े। बूथ के अंदर कोई भी पैरामिलिट्री फ़ोर्स मौजूद नहीं रहती। CCTV फुटेज मौजूद है और पीठासीन अधिकारी तथा बाकी सभी लोगों के बयान भी हैं।