जामिया छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी होगी।
16 जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लगभग छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की योजना है।
प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ नोटिस, निलंबन, निष्कासन और कैंपस प्रतिबंध जैसे आदेश वापस लेने की बात कही गई है।
Jamia Student Union Election 2027: जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की मांगों पर विचार करते हुए छात्र संघ के संविधान और चुनाव को लेकर अहम आदेश जारी किया है। इसके तहत 15 मई 2027 तक छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और उसे लागू करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लगभग छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की बात कही गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के बाद करीब दो दशक से लंबित छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों और संबंधित नियमों के अनुसार कराए जाएंगे। संविधान को मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े आदेश वापस लिए जाएंगे। इसमें निष्कासन, निलंबन और कैंपस में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध जैसे कदम भी शामिल हैं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन और भूख हड़ताल चल रही थी। छात्र लंबे समय से निर्वाचित छात्र संघ बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने अपने आदेश के बादतत्काल प्रभाव से छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की थी। प्रशासन के आदेश के बाद कैंपस में जश्न का माहौल है और छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला किया है।
छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार पूरी की जाएगी। संविधान को मंजूरी मिलने के बाद चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के तहत मतदान और अन्य चुनावी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
जामिया में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं। ऐसे में प्रशासन के इस आदेश को छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव की प्रक्रिया संविधान को मंजूरी मिलने और निर्धारित समयसीमा के पालन पर निर्भर करेगी।