दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 सोर्स -AI
दिल्ली

Gen Z आंदोलन के बाद DUSU Election 2026, कब होगा मतदान, जानें क्या होंगे बड़े मुद्दे और किसके बीच होगी टक्कर?

DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 में ABVP और NSUI के बीच सीधी टक्कर के संकेत हैं। Gen Z के मुद्दे, हॉस्टल, सुरक्षा और SRCC विवाद चुनाव का केंद्र बने हैं।

करुणा नंद शाहवाल

Delhi University Election Gen Z Voters: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव को लेकर राजधानी का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। 18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित होंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, ABVP, NSUI, SFI और आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP अपने-अपने प्रचार अभियान और रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।

इसी बीच SRCC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कैंपस में आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार छात्र मतदाताओं के लिए असली मुद्दे क्या हैं और कौन सा संगठन युवाओं का भरोसा जीतकर DUSU की सत्ता तक पहुंचेगा।

Gen Z के मुद्दों के बीच बदल रहा DUSU चुनाव का मिजाज

दरअसल इस बार DU का छात्रसंघ चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। बता दें किहाल हीं में हुए नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर हुए देशभर में हुए आंदोलनों के बाद विभिन्न छात्र संगठन अब Gen Z मतदाताओं तक अपने संपर्क साधने की कोशिश में जूटें हुए हैं।

तो दूसरी तरफ ITO स्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यालय से लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के दफ्तरों तक बैठकों का दौर लगातार जारी है। लेकिन सवाल यह है कि इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बीच असली सवाल कैंपस के अंदर का है, और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र किन मुद्दों पर वोट करेंगे।

DUSU चुनाव में क्या हैं छात्रों के सबसे बड़े मुद्दे?

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में इस बार भी लॉ फैकल्टी छात्रों की राजनीति का अहम केंद्र बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि चुनावी वादों से ज्यादा ज़रूरी कैंपस की बुनियादी सुविधाओं का समाधान है।

LC-1 की छात्रा ने बताया कि, महिला छात्रों के लिए सैनिटेशन और सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि कैंपस के कई हिस्सों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात के समय आने-जाने में दिक्कत होती है।

हॉस्टल, सुरक्षा और कैंटीन बने बड़े चुनावी मुद्दे

छात्रों का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की सीमित सीटें भी एक बड़ी समस्या हैं। सीटें कम होने की वजह से बड़ी संख्या में छात्रों को महंगे पीजी या किराए के कमरों में रहना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई का खर्च काफी बढ़ जाता है।

वहीं, मिरांडा हाउस की छात्राओं ने बताया कि चुनाव के दौरान कैंपस में शोर-शराबा तो रहता ही है, लेकिन छात्रों के लिए कैंटीन की व्यवस्था भी अहम मुद्दा है। उन्होंने कहा कि शाकाहारी और नॉन-वेज भोजन एक ही काउंटर पर मिलने से कई छात्रों को असुविधा होती है, इसलिए दोनों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

ABVP ने शुरू की प्री-कैंपेनिंग, 9 संभावित चेहरों पर दांव

DUSU चुनाव 2026 को लेकर ABVP ने प्री-कैंपेनिंग का आगाज कर दिया है। संगठन ने शुरुआती तौर पर नौ संभावित उम्मीदवारों को आगे बढ़ाया है, जिनमें आलोक अत्री, आयुषी शर्मा, इशु मौर्य, नितिन तंवर, रिया छावरी, सनी डेडहा, तान्या मावी, यश डबास और लक्ष्य राज सिंह शामिल हैं।

हालांकि, नामांकन से पहले इन नामों में बदलाव की संभावना बनी हुई है। ABVP फिलहाल उम्मीदवारों की लोकप्रियता, कैंपस में व्यक्तिगत प्रभाव और संभावित वोट बैंक का आकलन कर अंतिम पैनल तैयार करने में जुटा है।

1000 ID कार्ड के आधार पर हुआ उम्मीदवारों का आकलन

सूत्रों के मुताबिक, संगठन ने करीब 1,000 छात्र आईडी यानी संभावित मतदाताओं के डेटा के आधार पर भी दावेदारों की पकड़ का मूल्यांकन किया। इस आंतरिक आकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नौ चेहरों को प्री-कैंपेनिंग के लिए चुना गया, जबकि अन्य संभावित दावेदारों को फिलहाल सूची से बाहर रखा गया है।

खोया जनाधार वापस पाने की कोशिश में NSUI

DUSU चुनाव 2026 में NSUI भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है। संगठन ने आठ संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ प्री-कैंपेनिंग शुरू कर दी है। कार्यकर्ता लगातार विभिन्न कॉलेजों और विभागों में पहुंचकर छात्रों के बीच संवाद और जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।

ABVP बनाम NSUI की सीधी टक्कर के संकेत

ABVP और NSUI के अलावा आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP तथा SFI भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। हालांकि, मौजूदा कैंपस माहौल और चुनावी समीकरणों को देखते हुए इस बार का भी मुख्य मुकाबला ABVP और NSUI के बीच ही माना जा रहा है, जबकि अन्य संगठन तीसरे विकल्प के तौर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं।

कई राज्यों से बुलाए जा रहे कार्यकर्ता

DUSU चुनाव जीतने के लिए छात्र संगठन अब बूथ स्तर की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ABVP ने अलग-अलग राज्यों से अपने संगठन मंत्रियों और कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाना शुरू कर दिया है, ताकि वे अपने-अपने राज्यों के छात्रों से सीधे संपर्क कर सकें।

वहीं, NSUI भी अपने चुनाव अभियान को मजबूत करने के लिए विभिन्न राज्यों से कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुला रही है। चुनाव प्रभारी अखिलेश यादव के मुताबिक, उनकी टीम के सदस्य कैंपस में प्रचार और छात्र संपर्क अभियान में हिस्सा लेंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए छात्रों तक पहुंचने की तैयारी

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में छात्र संगठन इस बार सांस्कृतिक आयोजनों पर भी जोर दे रहे हैं। ABVP मध्यांचल और पूर्वांचल जैसे कार्यक्रमों के जरिए छात्रों से जुड़ने और अपने उम्मीदवारों को कैंपस में पेश करने की तैयारी कर रही है। तो वहीं NSUI भी ऐसे ही छात्र-केंद्रित कार्यक्रमों को आयोजित करने की योजना बना रही है।

वहीं ASAP ने Clean the Campus जैसे अभियानों के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश शुरू की है। AISA और SFI ने अभी पूरी ताकत से चुनाव प्रचार शुरू नहीं किया है। माना जा रहा है कि उनका फोकस Gen Z के मुद्दों और हाल के छात्र आंदोलनों पर रहेगा।

10 सितंबर के बाद साफ होगी चुनावी तस्वीर

फिलहाल छात्रसंघ चुनाव प्रचार शुरुआती चरण में है। 10 सितंबर को नामांकन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में हैं और किस संगठन ने किन चेहरों पर अंतिम दांव लगाया है। वहीं लग्जरी गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों पर छात्र संगठनों का कहना है कि वे पांच वाहनों की निर्धारित सीमा और अन्य चुनावी नियमों का पालन करेंगे।

हालांकि इन दावों की वास्तविक तस्वीर नामांकन के बाद ही सामने आएगी। उधर, DUSU चुनाव के प्रभारी प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह ने साफ किया है कि विश्वविद्यालय लिंगदोह समिति के सभी दिशा-निर्देशों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

SRCC में PM मोदी के कार्यक्रम पर सियासी घमासान

DUSU चुनाव के बीच SRCC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर कैंपस की राजनीति गरमा गई है। NSUI के चुनाव प्रभारी अखिलेश यादव ने X पर सवाल उठाते हुए कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद प्रधानमंत्री का विश्वविद्यालय में कार्यक्रम कैसे आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने इसे चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश बताया। वहीं, ABVP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। दिल्ली प्रदेश के मीडिया संयोजक हरेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सरकारी था और इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने NSUI पर तंज कसते हुए कहा कि यदि कांग्रेस को आपत्ति है, तो उसे अपने नेता राहुल गांधी को भी छात्रों के बीच लाना चाहिए।

DUSU में कितने कॉलेज और विभाग आते हैं?

दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेज DUSU चुनाव का हिस्सा नहीं हैं। DUSU के अंतर्गत 47 कॉलेज और 5 विभाग आते हैं, जबकि बाकी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव अलग से कॉलेज स्तर पर कराए जाते हैं।

DUSU चुनाव में किन पदों पर होता है मतदान?

DUSU में चार प्रमुख पदों के लिए चुनाव होता है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव। इन पदों के लिए ABVP, NSUI, SFI, ASAP समेत कई छात्र संगठन अपने उम्मीदवार उतारते हैं। मतदान EVM के जरिए कराया जाता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) की स्थापना 1954 में हुई थी। हालांकि, 1975-76 के आपातकाल, 1990 में मंडल आयोग आंदोलन और कोरोना महामारी के दौरान 2020 से 2023 तक चुनाव नहीं हो सके। इस बार 10 सितंबर को नामांकन, 18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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