वात्सल्य और महागणपति डेवलपर्स सोर्स - AI जनरेटेड
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ रेरा ने वात्सल्य और महागणपति डेवलपर्स पर कसा शिकंजा, रिफंड व फाइन का दिया आदेश

Chhattisgarh RERA Order Raipur Developers : वात्सल्य और महागणपति डेवलपर्स पर छत्तीसगढ़ रेरा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 33.70 लाख रुपये रिफंड तथा 8 लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

ऐश्वर्या द्विवेदी

Vatsalya And Mahaganapati Developers RERA Penalty : छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आबंटियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने वात्सल्य डेवलपर्स को जमा राशि ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। आबंटी को मूल राशि और ब्याज मिलाकर 33.70 लाख रुपये मिलेंगे। दूसरे मामले में बिना रेरा पंजीयन प्लॉट बेचने पर सख्त कार्रवाई हुई है। महागणपति डेवलपर्स पर 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

CGRERA का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने आबंटी के पक्ष में फैसला सुनाया है। मामला राजधानी रायपुर के सेजबहार स्थित वात्सल्य डेवलपर्स से जुड़ा हुआ है। प्राधिकरण ने प्रमोटर को कुल 33.70 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। इसमें 15.09 लाख रुपये की मूल राशि शामिल है। इसके अलावा 18.61 लाख रुपये का ब्याज भी दिया जाएगा।

बिना सूचना निरस्त की बुकिंग

आबंटी ने वर्ष 2012 में प्रमोटर के साथ अनुबंध किया था। उसने आवासीय प्लॉट के लिए बुकिंग कराई थी। वर्ष 2012 से 2015 के बीच पूरे पैसे जमा किए गए थे। आबंटी ने कुल 15 लाख 9 हजार 300 रुपये का भुगतान किया था।

पूरा पैसा मिलने के बाद भी प्रमोटर ने कब्जा नहीं दिया। प्रमोटर ने बिना पूर्व सूचना के बुकिंग निरस्त कर दी। इसके बाद आबंटी ने अपनी राहत के लिए प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्राधिकरण ने अभिलेखों की जांच करके आबंटी के पक्ष में निर्णय दिया।

महागणपति पर जुर्माना

एक अन्य मामले में प्राधिकरण ने महागणपति डेवलपर्स पर कार्रवाई की है। यह मामला बिना पंजीयन प्लॉट बेचने से जुड़ा है। प्रमोटर एक प्लॉटेड ले-आउट परियोजना विकसित कर रहा था। इसमें बिना रेरा पंजीयन के भूखंड बेचे जा रहे थे। भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 का स्पष्ट उल्लंघन किया गया था। बिना पंजीयन विज्ञापन, बुकिंग या बिक्री करना पूरी तरह अवैध है।

स्वप्रेरणा से ली गई कार्रवाई

प्राधिकरण ने इस मामले में स्वप्रेरणा से संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई के बाद उल्लंघन की पुष्टि हुई। प्राधिकरण ने महागणपति डेवलपर्स पर 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।

प्रमोटर को परियोजना का पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण के फैसले से आबंटियों के हितों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। नियम तोड़ने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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