पति के पक्ष में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम आदेश, लगातार कानूनी कार्रवाई मानी जाएगी मानसिक क्रूरता

Chhattisgarh High Court Divorce Order : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि झूठे मुकदमों में बरी होने के बाद भी केस जारी रखना पति के प्रति मानसिक क्रूरता है।
Significant Chhattisgarh High Court Order: Persistent Legal Action Deemed Mental Cruelty
छत्तीसगढ़ हाई कोर्टसोर्स- सोशल मीडिया
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High Court Judgment On Mental Cruelty : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया। कोर्ट ने लगातार कानूनी कार्रवाई को पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना। पति और उसके परिवार वाले दहेज प्रताड़ना केस से बरी हो चुके थे। इसके बाद भी पत्नी की तरफ से कानूनी लड़ाई लगातार जारी रखी गई। अदालत ने फैमिली कोर्ट का फैसला बदलते हुए विवाह समाप्त कर दिया।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद पर अहम फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि सिर्फ केस दर्ज कराना मानसिक क्रूरता नहीं है। लेकिन मुकदमों में बरी होने के बाद भी कानूनी लड़ाई जारी रखना क्रूरता है। इससे पति को भारी मानसिक तनाव और उत्पीड़न सहना पड़ता है।

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जानिए क्या था पूरा विवाद

जांजगीर निवासी विशंभर प्रसाद राठौर की शादी 2 जून 2015 को हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। पति ने पत्नी पर दुर्व्यवहार और अशांति फैलाने का आरोप लगाया। पति ने पत्नी की मानसिक बीमारी छिपाने का भी आरोप लगाया था। हालांकि फैमिली कोर्ट ने 8 अगस्त 2019 को तलाक याचिका खारिज कर दी थी।

लगातार केस से बढ़ा तनाव

पति और उसके परिवार के सात लोगों पर दहेज प्रताड़ना का केस चला। 14 दिसंबर 2023 को अदालत ने सभी को बरी कर दिया। पत्नी की अपील भी 7 मार्च 2025 को खारिज हो गई। घरेलू हिंसा का केस भी 23 अगस्त 2024 को निरस्त हो चुका था।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की बेंच ने सुनवाई की। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का संदर्भ भी लिया। कोर्ट ने कहा कि लगातार मुकदमों से पति को मानसिक पीड़ा हुई है। हालांकि कोर्ट ने पत्नी की बीमारी वाले आरोप को स्वीकार नहीं किया। अंततः हाई कोर्ट ने दोनों का विवाह समाप्त करने का आदेश जारी किया।

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