कोरबा में हाथी के बच्चे का जन्मदिन का जश्न (सोर्स- सोशल मीडिया)
कोरबा

कोरबा में नन्हे हाथी की मनाई छठी, नाम रखा 'काशी', मंदिर में पूजा-पाठ के बाद 7 गांव के लोगों ने किया भोज

Korba Forest Area: करतला वन परिक्षेत्र के जंगल में घूम रहे 9 हाथियों के झुंड में जन्मे नन्हे हाथी की रविवार को ग्रामीणों ने छठी मनाई। सात गांवों के लोग एकजुट हुए और नवजात हाथी का नाम 'काशी' रखा।

घनश्याम गंधर्व, चंदू निर्मलकर

Highlights

  • इंसानों और हाथियों के बीच अनोखा जुड़ाव।

  • करतला वन परिक्षेत्र के जंगल का मामला।

  • 9 हाथियों के झुंड में जन्मे नन्हे हाथी का मनाया छठी।

  • 7 गांव के लोग हुए एकजुट, भजन कीर्तन कर मनाई खुशी।

Baby Elephant Birthday Celebration In korba: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंसानों और हाथियों के बीच अनोखा जुड़ाव देखने को मिला। करतला वन परिक्षेत्र के जंगल में घूम रहे 9 हाथियों के झुंड में जन्मे नन्हे हाथी की रविवार को ग्रामीणों ने छठी मनाई। सात गांवों के लोग एकजुट हुए और नवजात हाथी का नाम 'काशी' रखा। इस दौरान पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।

जंगल में जन्मे नन्हे हाथी के लिए जुटे ग्रामीण

यह आयोजन काशीपानी जंगल में कारीपानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान टिकरापारा में हुआ। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने नन्हे हाथी के स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना की।

ग्रामीणों के मुताबिक, इस इलाके में करीब 20 वर्षों से हाथियों का आना-जाना लगा हुआ है। हाथियों का यह पुराना कॉरिडोर है, जहां झुंड लंबे समय तक रहने के बाद दूसरे इलाकों की ओर चला जाता है।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी, फसलों को भी नुकसान

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, करतला रेंज के काशीपानी जंगल में 9 हाथियों का झुंड मौजूद है। वहीं, कुदमुरा रेंज में 32 और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी घूम रहे हैं। इस तरह जिले में कुल 48 हाथियों की मौजूदगी बताई गई है। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए हाथियों की मौजूदगी के बीच सतर्क रहना भी जरूरी है।

2000 में पहली बार पहुंचे थे हाथी

बताया जाता है कि कोरबा जिले में वर्ष 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथियों की मौजूदगी दर्ज हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। कुछ मौकों पर जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है। नन्हे हाथी की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। समय के साथ ग्रामीणों में हाथियों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब लोग धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और दूरी बनाए रखने की जरूरत पर भी ध्यान दे रहे हैं।

वन विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

वन विभाग के एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों के करीब नहीं जाने और उनसे किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हाथियों से होने वाले फसल नुकसान पर नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सावधानी बरतना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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