अवैध शराब सोर्स- सोशल मीडिया
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में फर्जी होलोग्राम और लेबल लगाकर बेची जा रही थी दूसरे राज्यों की अवैध शराब

Chhattisgarh liquor scam : छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों की अवैध शराब पर नकली होलोग्राम और लेबल लगाकर बेचने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।

ऐश्वर्या द्विवेदी

Chhattisgarh illegal liquor scam : छत्तीसगढ़ में अवैध शराब की तस्करी का एक नया तरीका सामने आया है। दूसरे राज्यों की शराब पर छत्तीसगढ़ के नकली होलोग्राम लगाए जा रहे थे। पुलिस ने राजनांदगांव, महासमुंद और कांकेर में बड़ी कार्रवाइयां की हैं। पैकिंग का सामान दिल्ली, पुणे और नागपुर से मंगाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में अब तक 14 आरोपी पकड़े गए हैं।

छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का भंडाफोड़

छत्तीसगढ़ में अवैध शराब का कारोबार अब नए रूप में सामने आ रहा है। तस्कर दूसरे राज्यों से सस्ती शराब ला रहे हैं। वे उस पर छत्तीसगढ़ का नकली लेबल और होलोग्राम लगा रहे हैं। इससे शराब स्थानीय उत्पाद जैसी दिखाई देती है।

जनवरी से सितंबर के बीच कई जिलों में कार्रवाई हुई है। पुलिस ने मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड की शराब जब्त की है। डोंगरगढ़, महासमुंद, कांकेर और सूरजपुर में भारी मात्रा में सामान मिला है।

नकली होलोग्राम का पूरा खेल

शराब की बोतल पर लगा होलोग्राम एक सुरक्षा चिन्ह होता है। सरकार इसे बोतलों के ढक्कन पर लगवाती है। तस्कर इसी सुरक्षा प्रणाली को निशाना बना रहे हैं।

दूसरे राज्य की शराब को सीधे बेचना जोखिम भरा होता है। उसकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसलिए छत्तीसगढ़ के लेबल और ढक्कन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पहचान छिपाना काफी आसान हो जाता है।

अलग-अलग जगहों से जुड़ा नेटवर्क

डोंगरगढ़ में जून महीने में एक बड़ा मामला सामने आया। शराब मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ लाई जा रही थी। हालांकि पैकिंग का सामान अलग-अलग शहरों से आ रहा था।

पुलिस के अनुसार होलोग्राम और स्टिकर दिल्ली, पुणे और नागपुर से मंगाए जाते थे। तस्कर अलग-अलग राज्यों से सामान जुटाते थे। इसके बाद किसी गुप्त ठिकाने पर बॉटलिंग की जाती थी।

डोंगरगढ़ बना तस्करी का केंद्र

डोंगरगढ़ क्षेत्र अंतरराज्यीय सीमा के काफी करीब स्थित है। यह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमाओं से सटा हुआ है। इसी वजह से यह इलाका तस्करी का केंद्र बन गया है।

छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट से शराब डोंगरगढ़ लाई जाती है। तस्कर पहले मध्य प्रदेश के लेबल के साथ ही शराब बेचते थे। अब वे स्थानीय बोतलों में शराब भरकर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

महासमुंद और भानुप्रतापपुर में रेड

महासमुंद के सरायपाली में अगस्त में एक कार पकड़ी गई। कार से 25 पेटियों में 1,192 पौवा शराब जब्त हुई। सितंबर तक इस मामले में 3,229 लीटर से ज्यादा शराब मिली। इस दौरान सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

कांकेर के भानुप्रतापपुर में सितंबर में बड़ी कार्रवाई हुई। वहां से 4,409 खाली बोतलें और पौवे बरामद हुए। साथ ही 3,380 ढक्कन और 105 पत्ते होलोग्राम के मिले।

राजनांदगांव और सूरजपुर का सच

सितंबर के अंत में राजनांदगांव में फिर कार्रवाई हुई। पुलिस ने 9,600 बोतल शराब जब्त की। इस कार्रवाई में दो और तस्कर गिरफ्तार किए गए। अब तक इस नेटवर्क के 14 लोग पकड़े जा चुके हैं।

सूरजपुर में मामला थोड़ा अलग पाया गया। वहां एक घर से 12 लीटर मिलावटी शराब मिली। साथ ही 2,500 नकली ढक्कन और 200 रैपर बरामद हुए। वहां मिलावट करके ब्रांडेड शराब बनाई जा रही थी।

ग्राहकों के लिए बढ़ा बड़ा खतरा

नकली होलोग्राम से केवल सरकारी राजस्व का नुकसान नहीं होता। यह आम ग्राहकों की सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक है। ग्राहक को पता नहीं होता कि अंदर कौन सी शराब है।

मिलावटी शराब पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इससे जान जाने का जोखिम भी बना रहता है। इसलिए बोतल के ढक्कन और होलोग्राम की जांच बेहद जरूरी है।

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