राजस्थान में फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का खुलासा (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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राजस्थान में फर्जी MBBS डिग्री रैकेट का पर्दाफाश… 20-25 लाख में बन रहे थे नकली डॉक्टर

Fake MBBS Racket: राजस्थान में एसओजी ने एक बड़े फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का खुलासा किया है, जहां 20-25 लाख रुपये लेकर बिना परीक्षा पास किए विदेशी छात्रों को फर्जी डॉक्टर बनाया जा रहा था।

प्रिया सिंह

Fake Medical Registration Scam Rajasthan: राजस्थान में चिकित्सा क्षेत्र को शर्मसार करने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है जहां अयोग्य लोगों को डॉक्टर बनाया जा रहा था। राजस्थान में फ़र्ज़ी मेडिकल रजिस्ट्रेशन घोटाला के तहत विदेशी डिग्री वाले छात्रों को बिना जरूरी परीक्षा पास किए फर्जी प्रमाण पत्र दिए गए। अवैध MBBS डिग्री रैकेट की जांच के दौरान अब तक 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जो मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। राजस्थान मेडिकल काउंसिल भ्रष्टाचार मामले की इस बड़ी कार्रवाई ने पूरे देश के चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है।

भारी वसूली और फर्जीवाड़ा

एसओजी की जांच में सामने आया है कि विदेश से MBBS करने वाले छात्र जो एफएमजीई परीक्षा पास नहीं कर पा रहे थे, उन्हें निशाना बनाया गया। इन छात्रों से फर्जी इंटर्नशिप और पंजीकरण दिलवाने के बदले में 20 से 25 लाख रुपये वसूले जा रहे थे। यह रकम दलालों और राजस्थान मेडिकल काउंसिल के भ्रष्ट अधिकारियों के बीच आपस में बांट दी जाती थी।

अधिकारियों की गिरफ्तारी

विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर और कई दलाल भी शामिल हैं जिन्होंने इस पूरे रैकेट को चलाया था। पुलिस की 21 से अधिक टीमों ने दिल्ली, जयपुर, उदयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में एक साथ छापेमारी की है।

संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान

जांच के दौरान अब तक 90 से अधिक ऐसे संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है जो फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर काम कर रहे थे। उदयपुर से पकड़े गए डॉ. यश पुरोहित ने तो फर्जी कागजातों के सहारे एक निजी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। वर्तमान में डॉ. राजेश शर्मा के कार्यकाल के दौरान हुए लगभग 4000 रजिस्ट्रेशन अब पुलिस की जांच के घेरे में हैं।

आईएमए की कड़ी प्रतिक्रिया

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद खतरनाक और निंदनीय करार देते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। आईएमए के वित्त सचिव डॉ. पीयूष जैन ने कहा कि बिना परीक्षा पास किए विदेशी स्नातकों को प्रमाण पत्र देना पूरी तरह गलत है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई आईएमए सदस्य इसमें शामिल पाया गया तो उसकी सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा पर खतरा

असली डिग्री धारक डॉक्टर भी इस फर्जीवाड़े से चिंतित हैं क्योंकि इससे उनकी कड़ी मेहनत और साख पर सवालिया निशान लग रहे हैं। अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों की मौजूदगी न केवल चिकित्सा पेशे को बदनाम करती है बल्कि मरीजों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है। सरकार ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी कर दिया है।

जारी है पुलिस की कार्रवाई

एसओजी की जांच अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में इस बड़े रैकेट से जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में टीमें इस घोटाले की हर एक कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। यह मामला दिखाता है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।

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