
अखिलेश यादव (Image- Social Media)
Sambhal Violence Case: संभल हिंसा मामले में अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि अब इन्हें बचाने कोई नहीं आएगा और ये पक्षपाती पुलिसकर्मी अकेले बैठकर बीजेपी के फॉर्मूले को याद करेंगे।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अब कोई बचाने नहीं आएगा। अब ये पक्षपाती पुलिसकर्मी अकेले में खाली बैठकर याद करेंगे। भाजपा का फ़ार्मूला नंबर 1 है, पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो! भाजपा का फ़ार्मूला नंबर 2 है – भाजपाई किसी के सगे नहीं होते।”
एक अन्य पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा, “अब पुलिस के बड़े अधिकारी कोर्ट के आदेश को अवैध बता रहे हैं। क्या इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा? कहीं माननीय न्यायालय इनके खिलाफ भी कार्रवाई न कर दे। सत्ता की चापलूसी के चक्कर में जरूरत से ज्यादा दरोगाई दिखाना कहीं महंगा न पड़ जाए।”
संभल जिले के चंदौसी स्थित कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। हालांकि पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी।
यह आदेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को उस याचिका पर दिया, जो हिंसा में घायल एक व्यक्ति के पिता द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे को पुलिस की गोली लगी थी। शिकायतकर्ता ने सीओ अनुज चौधरी, थाना प्रभारी अनुज तोमर और 10–12 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया है।
संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा था कि पुलिस कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी। उनका कहना है,
“हम अपील दायर करेंगे और एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, क्योंकि इस मामले में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है।”
फिलहाल अनुज चौधरी फिरोजाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल जिले की चंदौसी कोतवाली के प्रभारी हैं।
यह विवाद 19 नवंबर को शुरू हुआ था, जब वकील हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल जिला अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि शाही जामा मस्जिद एक पुराने हरिहर नाथ मंदिर के ऊपर बनाई गई है। उसी दिन अदालत के आदेश पर सर्वे कराया गया और 24 नवंबर को दूसरा सर्वे हुआ। दूसरे सर्वे के बाद संभल में हिंसा भड़क उठी, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।
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पुलिस ने इस हिंसा के संबंध में 12 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क और मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली समेत कई राजनीतिक हस्तियों सहित 2,000 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया है।






