चार कंपनियों ने LIC हाउसिंग फाइनेंस को पूरा बकाया मूलधन और 10% ब्याज चुकाने की पेशकश की है।
संबंधित कंपनियों ने LIC हाउसिंग फाइनेंस से कुल 980 करोड़ रुपये के लोन लिए थे।
चंद्रा का कहना है कि वे व्यक्तिगत कर्जदार नहीं, बल्कि एसेल ग्रुप की कंपनियों के कर्ज में पर्सनल गारंटर थे।
LIC Housing Finance Loan Case: एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LIC Housing Finance) से जुड़े लोन मामले में डॉ. सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी वाली चार कंपनियों ने कर्ज चुकाने के लिए सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनियां बकाया मूलधन का 100 प्रतिशत और उस पर 10 प्रतिशत ब्याज चुकाने को तैयार हैं। यह प्रस्ताव उन कर्जों से जुड़ा है, जिनके लिए चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनियों ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को कर्ज चुकाने के लिए प्रस्ताव सौंपे हैं। इनमें पूरा बकाया मूलधन और 10 प्रतिशत ब्याज चुकाने की पेशकश की गई है।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से वसंत सागर प्रॉपर्टीज लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने कुल 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्प्रिट इंफ्रापावर प्रोजेक्ट ने भी कंपनी से 480 करोड़ रुपये का लोन लिया था।
सूत्रों के मुताबिक, चारों कंपनियों ने अब 100 प्रतिशत बकाया मूलधन और 10 प्रतिशत ब्याज के साथ कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और उसके क्रियान्वयन की स्थिति की अलग से पुष्टि जरूरी है।
इससे पहले डॉ. सुभाष चंद्रा ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की कार्यवाही में कर्ज पर 99.97 प्रतिशत हेयरकट को उनकी भारी-भरकम व्यक्तिगत कर्ज माफी के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
चंद्रा का कहना था कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर उधारदाताओं से पैसा नहीं लिया था। वह केवल एसेल ग्रुप से जुड़ी कर्ज लेने वाली कंपनियों के ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटर बने थे। उन्होंने यह भी कहा था कि कर्ज लेने वाली कंपनियों के बकाये को उनका व्यक्तिगत कर्ज बताना सही नहीं है।
चंद्रा के बयान के अनुसार, 22,006 करोड़ रुपये का आंकड़ा संबंधित कार्यवाही में दाखिल किए गए कुल दावों को दर्शाता है। इसे उनका व्यक्तिगत बकाया कर्ज नहीं माना जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, इनमें से 21,696 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए गए थे। भुगतान योजना का विरोध करने वाले उधारदाताओं के कुल दावे लगभग 3,992 करोड़ रुपये थे।
चंद्रा ने बताया था कि इनमें से 620 करोड़ रुपये के दावे पहले ही निपटाए जा चुके थे, जिसके बाद लगभग 3,372 करोड़ रुपये की राशि शेष रह गई थी।
चंद्रा के बयान के मुताबिक, कर्ज लेने वाली कंपनियों ने आपत्ति जताने वाले कुछ उधारदाताओं को लगभग 1,113 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी। इस संबंध में बातचीत जारी होने की बात भी कही गई थी।
अब एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से जुड़े ताजा मामले में चार कंपनियों की ओर से मूलधन और ब्याज चुकाने के प्रस्ताव सामने आए हैं। इन प्रस्तावों पर आगे क्या निर्णय होता है, यह मामले की अगली प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।