

Subhash Chandra Allegations On Mukesh Ambani: भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ी हलचल मच गई है। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने NCLT मामले को लेकर एक बेहद विस्फोटक और सनसनीखेज बयान जारी किया है। अपने इस आधिकारिक बयान में डॉ. चंद्रा ने पहली बार देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने के प्रमुख मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क (TV18/CNBC/News18) का सीधा नाम लेते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ जानबूझकर 'फेक नैरेटिव' और 'विच हंटिंग' चलाने की सोची-समझी कोशिश की जा रही है।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने मीडिया में उनके कर्ज को लेकर चलाए जा रहे आंकड़ों को पूरी तरह से भ्रामक और झूठा बताया है। उनका कहना है कि मीडिया में ₹22,000 करोड़ के कर्ज का झूठा आंकड़ा फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
इस भ्रामक खबर के सामने आने के बाद, डॉ. चंद्रा ने खुद मुकेश अंबानी से संपर्क साधने की कोशिश की थी। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने इस संबंध में मुकेश अंबानी को फोन करने का प्रयास किया और उन्हें एक पत्र भी लिखा। इतना ही नहीं, जब एक साझा मित्र ने नेटवर्क18 के चीफ एडिटर से इस क्रेडिबिलिटी खराब करने वाली रिपोर्ट के बारे में बात की, तो संपादक की तरफ से जवाब मिला कि "उन्हें ऊपर से निर्देश हैं और वे मजबूर हैं"।
अपने बयान में डॉ. सुभाष चंद्रा ने साल 2019 के उस दौर की एक बेहद चौंकाने वाली घटना का भी जिक्र किया है जब Essel Group गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा था। उन्होंने दावा किया कि जनवरी 2019 में बेनामी कंपनियों के जरिए एक ही दिन में 'जी' के शेयरों को 40% तक क्रैश करवा दिया गया था।
इसके बाद जब डॉ. चंद्रा कर्ज निपटाने के लिए 'जी' को बेचने का प्रस्ताव लेकर मुकेश अंबानी के पास पहुंचे, तो अंबानी ने उन्हें सलाह देते हुए कहा था, "सुभाष जी, आप क्यों बैंकों का पैसा ब्याज समेत चुका रहे हैं? कोई नहीं चुकाता"। चंद्रा ने आरोप लगाया कि बाद में विदेशी निवेशक इन्वेस्को के साथ मिलकर 'जी' को हथियाने का भी प्रयास किया गया था, जिसे उन्होंने छोटे शेयरधारकों के हित में न होने के कारण खारिज कर दिया और सोनी के साथ मर्जर का रास्ता चुना।
डॉ. चंद्रा ने अपने कर्ज के आंकड़ों को साफ करते हुए खुद को देश का एक जिम्मेदार और गर्वित कॉर्पोरेट नागरिक बताया जो संकट के समय भागा नहीं। उन्होंने आंकड़ों के जरिए सच्चाई सामने रखते हुए बताया कि उनके ग्रुप पर कुल ₹45,000 करोड़ का कर्ज था, जिसमें से उन्होंने अपनी निजी संपत्तियों और 'जी' के शेयरों को बेचकर ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर दिया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपने पूरे व्यावसायिक सफर के दौरान उन्होंने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को केवल ब्याज के रूप में ही ₹60,000 से ₹70,000 करोड़ रुपये दिए हैं। वर्तमान में केवल दो संस्थानों के खाते बचे हैं, जिनके पास ऋण के बदले पर्याप्त सुरक्षा (एसेट्स) मौजूद है और उन्हें कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा।
मुकेश अंबानी को सीधे शब्दों में आगाह करते हुए डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि उन्होंने धीरूभाई अंबानी से बहुत कुछ सीखा है, लेकिन लगता है कि मुकेश अंबानी ने अपने पिता के उन सिद्धांतों और उसूलों को नहीं अपनाया है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, "आप उस व्यक्ति को मारने की कोशिश कर रहे हैं जिसके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा"।
उन्होंने अंबानी से अपने सहयोगियों जैसे मनोज मोदी को इस तरह का प्रोपेगेंडा रोकने के लिए कहने को कहा। चंद्रा ने चेतावनी दी कि यदि यह 'विच हंटिंग' तुरंत बंद नहीं की गई, तो वे शांत नहीं बैठेंगे, क्योंकि अंबानी के पास खोने के लिए बहुत कुछ है और उनकी आलमारी में भी कई कंकाल बंद हैं।
विपक्ष के कुछ सांसदों द्वारा उठाए जा रहे सवालों और राजनीतिक गपशप पर स्थिति स्पष्ट करते हुए डॉ. चंद्रा ने कहा कि 2014 में 'जी न्यूज' ने नरेंद्र मोदी का समर्थन सिर्फ जनता की आवाज के रूप में किया था। उन्होंने साफ किया कि इतने बड़े वित्तीय संकट के बाद भी उन्होंने कभी प्रधानमंत्री या सरकार से बैंकों को फोन करवाने या किसी भी प्रकार की सिफारिश की मदद नहीं मांगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी सांसद केवल राजनीतिक एजेंडे और पार्टी फंड की जरूरतों के लिए बड़े धनबल वाले घरानों के इशारे पर यह झूठा मुद्दा उठा रहे हैं। अंत में, उन्होंने कामना की कि मुकेश अंबानी दुनिया के नंबर वन फाइनेंसर बनें, लेकिन भारत के अंदर इस तरह का खतरनाक कॉर्पोरेट गेम खेलना तुरंत बंद करें।