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भारत में बेरोजगारी दर घटी, सितंबर में 5% पर पहुंची; ग्रामीण इलाकों में ज्यादा सुधार
बेरोजगारी पर राहत की खबर, सालाना आधार पर 0.2% की गिरावट; गांवों में दर 4.2%
देश में रोजगार के मोर्चे पर राहत, ग्रामीण बेरोजगारी घटी; शहरों में दर 6.8% पर स्थिर
Unemployment Rate In India Falls By 5%: विश्व में फैली अशांति और आर्थिक मंदी के बीच भारत के लिए सुकून भरी खबर है। प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार देश की बेरोजगारी दर सालाना आधार पर सितंबर में 0.2 प्रतिशत घटकर 5 प्रतिशत हो गई है। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों में दी गई।
एनएसओ के मुताबिक, इस दौरान ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 0.4 प्रतिशत कम होकर 4.2 प्रतिशत रह गई है। पिछले साल समान अवधि में यह 4.6 प्रतिशत पर थी। वहीं, शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर पिछले के समान ही सितंबर में करीब 6.8 प्रतिशत पर स्थिर रही है।
सितंबर में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 0.2 प्रतिशत बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई है। यह पिछले साल की समान अवधि में 55.3 प्रतिशत पर थी।
इस दौरान ग्रामीण एलएफपीआर 0.6 प्रतिशत बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 57.4 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी एलएफपीआर सालाना आधार पर 0.2 प्रतिशत कम होकर 50.7 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 50.9 प्रतिशत थी।
हालांकि, शहरी एलएफपीआर में सितंबर में मासिक आधार पर सुधार देखा गया है, जो कि 0.3 प्रतिशत का सुधार देखा गया है।
सितंबर 2026 में भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 34.6 प्रतिशत रही, जबकि अगस्त 2026 में यह 34.8 प्रतिशत थी। यानी इस दौरान कुल महिला एलएफपीआर में 0.2 प्रतिशत अंक की कमी आई।
हालांकि, शहरी महिलाओं की भागीदारी में सुधार देखने को मिला। सितंबर में शहरी महिला एलएफपीआर बढ़कर 25.9 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 25.4 प्रतिशत थी। यह अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात सितंबर में 52.7 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रहा। शहरी क्षेत्रों में इसमें सुधार दर्ज किया गया और यह बढ़कर 47.2 प्रतिशत हो गया, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
शहरी पुरुषों का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 70.7 प्रतिशत से बढ़कर 71 प्रतिशत हो गया। वहीं, शहरी महिलाओं का यह अनुपात 23.2 प्रतिशत से बढ़कर 23.5 प्रतिशत पहुंच गया।...एजेंसी इनपुट के साथ।