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MDR को लेकर व्यापारी चिन्तित
कैश पर लौट सकता है, व्यापार?
UPI पेमेंट पर MDR शुल्क लगाने की तैयारी
Traders Concerned About MDR charges On UPI बीते दिनों सरकार की तरफ से आया एक आदेश व्यापारियों के बीच संकट जैसी स्थिति खड़ा कर दी है। इसको लेकर व्यापारियों के विरोध को देखते हुए फिलहाल दिसंबर तक MDR पर रोक लगा दिया गया है। भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI बन चुका है। UPI को लेकर दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। इसकी वजह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) है। यानी व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाने वाला शुल्क है।
अगर भविष्य में छोटे व्यापारियों के लिए भी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होता है, तो इसका असर उनके मुनाफे के साथ ग्राहकों के भुगतान संबंधी आदतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल सामान्य बैंक खाते से किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई सामान्य MDR लागू नहीं है। लेकिन एक बड़ी बसह छिड़ गई है कि क्या डिजीटल होते देश में आम जनता कैश की तरफ फिर लौट सकती है?
देशभर में किराना स्टोर, चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता, मेडिकल स्टोर और छोटे कारोबारियों ने डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ग्राहक आसानी से मोबाइल से भुगतान कर सकते हैं और दुकानदार को खुले पैसों की समस्या से छुटकारा मिलता है।
लेकिन छोटे व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रत्येक डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है, तो कम बचत में काम करने वाले कारोबारियों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी दुकानदार को दिनभर में सैकड़ों छोटे भुगतान मिलते हैं और हर लेनदेन पर शुल्क देना पड़ता है, तो महीने के अंत तक यह रकम उसके मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।
UPI की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह है कि ग्राहकों को भुगतान के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। अगर भविष्य में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था में बदलाव होता है, तो दुकानदारों और ग्राहकों के बीच नई बहस शुरू हो सकती है।
व्यापारियों को आशंका है कि शुल्क का बोझ बढ़ने पर कुछ दुकानदार ग्राहकों को नकद भुगतान के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
डिजिटल भुगतान से दुकानदारों को लेनदेन का रिकॉर्ड रखने, नकदी संभालने की परेशानी कम करने और ग्राहकों को सुविधाजनक भुगतान विकल्प देने में मदद मिलती है। ऐसे में किसी भी शुल्क संबंधी बदलाव का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भी पड़ सकता है।
एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना जरूरी है, तो दूसरी तरफ भुगतान प्रणाली से जुड़े कारोबारियों और बैंकों की लागत का भी ध्यान रखना पड़ता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, जिसमें डिजिटल भुगतान सस्ता और आसान बना रहे तथा छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाएगा या डिजिटल भुगतान पहले की तरह बिना सामान्य MDR के जारी रहेगा? जब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय नहीं होता, तब तक दुकानदारों को आशंकाओं के आधार पर अपनी भुगतान व्यवस्था बदलने की जरूरत नहीं है।
MDR शुल्क को लेकर सरकार की नीति बिल्कुल साफ है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच लेनदेन को लेकर कोई भी MDR के रुप में अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन लोगों के मन में एक भ्रांति पनप चुकी है कि हर लेनदेन में अतिरिक्त शुल्क देना होगा। आम जनता और छोटे व्यापारियों के बीच MDR को लेकर भ्रांतियों को दूूर करना सरकार की जिम्मेदारी और जनता को MDR शुल्क को समझना सबसे बड़ी चुनौति होगी।