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GST रिफॉर्म से डेयरी सेक्टर में आएगी तेजी, 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को फायदा; होगी बंपर कमाई

GST 2.0: भारतीय डेयरी क्षेत्र का कुल बाजार आकार 2024 में 18.98 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। जीएसटी सुधार इस क्षेत्र में जीएसटी दरों में सबसे बड़े सुधारों में से एक है।

मनोज आर्या

GST Reform: जीएसटी सुधारों से देश के डेयरी सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक और उत्पादन क्षमता को बूस्ट मिलेगा। इसके साथ ही 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को इससे फायदा होगा। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई। 56वीं जीएसटी काउंसिल ने भारत के डेयरी क्षेत्र में दुग्ध और दुग्ध उत्पादों पर टैक्स में भारी कटौती की है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जिसका उत्पादन 2023-24 में 239 मिलियन टन था, जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 24 प्रतिशत है।

डेयरी क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.5 प्रतिशत का योगदान देती है। भारतीय डेयरी क्षेत्र का कुल बाजार आकार 2024 में 18.98 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है। जीएसटी सुधार इस क्षेत्र में जीएसटी दरों में सबसे बड़े सुधारों में से एक है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि अधिकांश डेयरी उत्पाद अब या तो कर से मुक्त हैं या केवल 5 प्रतिशत की दर से कर योग्य हैं।

पहले भी जीएसटी फ्री था दूध

अल्ट्रा हाई टेम्परेचर (यूएचटी) दूध को छोड़कर सभी डेयरी दूध पहले से ही जीएसटी से मुक्त थे। समान वस्तुओं पर समान कर लागू करने के लिए अब यूएचटी दूध को भी छूट दी गई है। सोया दूध पेय को छोड़कर, प्लांट-आधारित दुग्ध पेय पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जबकि सोया दूध पेय पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था। प्लांट-आधारित दुग्ध पेय और सोया दूध पेय पर जीएसटी की दर अब घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है।

टैक्स में बदलाव से डेयरी को मिलेगा बढ़ावा

जीएसटी घटाने से पहले, प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले पनीर अलावा अन्य रूप में बेचे जाने वाले पनीर पर पहले से ही शून्य दर लागू थी। इस कारण, टैक्स में बदलाव केवल प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले रूप में आपूर्ति किए जाने वाले पनीर के संबंध में किए गए हैं। इस उपाय का उद्देश्य भारतीय पनीर को बढ़ावा देना है। इस महत्वपूर्ण कर-युक्तिकरण से डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे देश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

लागत कम होने से बचत में इजाफा

सरकार के अनुसार, इस सुधार से 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण किसान परिवारों, विशेष रूप से छोटे, सीमांत और भूमिहीन मजदूरों, जो अपनी आजीविका के लिए दुधारू पशुओं का पालन-पोषण करते हैं, को सीधे लाभ होगा, साथ ही उपभोक्ताओं के एक बड़े वर्ग को भी सहायता मिलेगी। कम टैक्स से परिचालन लागत कम करने, मिलावट पर अंकुश लगाने और घरेलू तथा निर्यात दोनों बाजारों में भारतीय डेयरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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