Lalu Yadav on Rabri Residence Row: बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास और लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान लालू प्रसाद यादव ने कहा कि उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा वापस लिए जाने के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हाथ है। उन्होंने कहा, “हां, सुरक्षा हटा ली गई है। यह सब नीतीश कुमार ने ही करवाया है।” लालू के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
हाल ही में बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली Z+ सुरक्षा वापस ले ली थी। सरकार की ओर से दावा किया गया कि यह निर्णय राज्य सुरक्षा समिति की समीक्षा के आधार पर लिया गया है, जिसकी बैठक 4 जून को हुई थी। सरकार का कहना है कि सुरक्षा श्रेणियों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और उसी के आधार पर यह फैसला लिया गया।
सुरक्षा हटाए जाने के बाद लालू-राबड़ी परिवार ने अपने आवास के बाहर तैनात पुलिस बल को वापस भेज दिया था। इसके बाद RJD नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राबड़ी आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली थी। हालांकि बाद में सरकार ने स्थिति को देखते हुए करीब 42 पुलिसकर्मियों की तैनाती फिर से राबड़ी आवास के बाहर कर दी।
राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली कराने का नोटिस पहले ही जारी किया गया था। इस पर राबड़ी देवी ने शुरुआत में आवास खाली करने से इनकार किया था और कहा था कि सरकार चाहे तो पुलिस लगाकर बंगला खाली करा ले। इसके जवाब में सरकार की ओर से कहा गया कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और नियमों के अनुसार इसे खाली करना जरूरी है।
अब राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली करने पर सहमति जताई है और 39 हार्डिंग रोड स्थित नए सरकारी आवास में जाने की बात कही है। हालांकि उन्होंने नए बंगले में लालू प्रसाद यादव की सेहत को देखते हुए रैंप, लिफ्ट और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था की मांग की है। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों के लिए आउट हाउस बनाने की भी मांग की गई है। राबड़ी देवी ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि जब तक नए आवास में सभी जरूरी सुविधाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें वर्तमान आवास में रहने दिया जाए।
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इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। सुरक्षा और सरकारी आवास को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सियासी तनाव और बढ़ने की संभावना है।