Flying Car अब भारत में भी आ गई है। Source. Social Media
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पहाड़ों में अब सड़क नहीं, हवा से सफर? अल्मोड़ा के रवि टम्टा की Electric Flying Car ने भरी उड़ान

Flying Car India: क्या आपने कभी सोचा है कि पहाड़ों की घुमावदार सड़कों और ट्रैफिक जाम को छोड़कर सीधे हवा में सफर किया जा सके?

सिमरन सिंह

HAPIDA SKYNeX Flying Car: क्या आपने कभी सोचा है कि पहाड़ों की घुमावदार सड़कों और ट्रैफिक जाम को छोड़कर सीधे हवा में सफर किया जा सके? उत्तराखंड के अल्मोड़ा से सामने आया एक इनोवेशन इसी सपने को हकीकत के करीब ले जाता दिख रहा है। बता दें कि काफलीखान गांव के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने अपने स्टार्टअप Hapida Sky के तहत HAPIDA SKYNeX Prototype का सफल टेस्ट फ्लाइट किया है। यह सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल मौजूदा ड्रोन टेक्नोलॉजी को मॉडिफाई करके तैयार किया गया है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी से तैयार हुआ फ्लाइंग व्हीकल

HAPIDA SKYNeX को लेकर बताए तो यह पारंपरिक पेट्रोल या डीजल इंजन वाली कार की तरह सड़क पर चलने के बजाय हवा में उड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं उपलब्ध जानकारी में बताया गया है कि यह एक शुरुआती प्रोटोटाइप है और इसके टेस्ट फ्लाइट ने प्रोजेक्ट के लिए अहम मील का पत्थर तय किया है। इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसका इलेक्ट्रिक पावर सिस्टम है। लेकिन इसे अभी आम लोगों के लिए उपलब्ध कार समझना सही नहीं होगा। प्रोटोटाइप को आगे कई तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों से गुजरना होगा।

पहाड़ों में क्यों गेमचेंजर साबित हो सकती है?

बता दें कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में कई जगह सड़क से छोटी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। ऐसे में रिपोर्ट बताती है कि रवि के गांव से करीब 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा में लगभग डेढ़ घंटे लग सकते हैं जबकि हवाई दूरी तय करने में यह समय काफी कम हो सकता है। ऐसे में अगर भविष्य में ऐसी तकनीक सुरक्षित और व्यावहारिक रूप से विकसित होती है तो दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर करने की संभावना बन सकती है। इसमें खासकर आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाने, मेडिकल इमरजेंसी और कठिन इलाकों तक तेजी से पहुंचने में इसका इस्तेमाल विचार करने लायक हो सकता है।

पर्यटन से लेकर रेस्क्यू तक बदल सकती है तस्वीर

उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में तेज परिवहन की जरूरत हमेशा से रही है। इलेक्ट्रिक पर्सनल एयर मोबिलिटी सफल होती है तो पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय परिवहन के नए विकल्प भी सामने आ सकते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग दावे और सवाल भी उठ रहे हैं। इसलिए इसे फिलहाल एक सफल टेस्ट किया गया प्रोटोटाइप मानना ही उचित है न कि तैयार कमर्शियल फ्लाइंग कार। इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले सुरक्षा, उड़ान नियंत्रण, बैटरी, पायलटिंग और नियामकीय मंजूरियों जैसे कई चरण बाकी हैं।

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