

Court Challan 10 Days: भारत में ट्रैफिक चालान कटना आम बात है लेकिन समय पर भुगतान न होने पर यही चालान कोर्ट तक पहुंच जाए तो वाहन मालिक की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में कोर्ट की तारीख, कागजी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के कारण महीनों तक मामला लटका रह सकता है। खासकर तब दिक्कत होती है जब RC ट्रांसफर, कार-बाइक बेचने, इंश्योरेंस रिन्यू कराने या फिटनेस सर्टिफिकेट जैसे जरूरी काम सामने हों। लेकिन अब ऐसे लोगों के लिए एक नई डिजिटल सर्विस शुरू की गई है जिसके जरिए कोर्ट में पेंडिंग चालान को 10 दिनों के भीतर निपटाने का दावा किया जा रहा है।
इसको लेकर Lawyered ने अपने डिजिटल ट्रैफिक प्लेटफॉर्म ChallanPay के तहत कोर्ट चालान के लिए यह नई सर्विस शुरू की है। जिसको लेकर कंपनी का कहना है कि जिन मामलों में वाहन मालिकों को पहले लंबा इंतजार करना पड़ता था उन्हें अब तय प्रक्रिया के तहत 10 दिनों में सुलझाने की कोशिश की जाएगी। वहीं इसको लेकर मकसद खासतौर पर उन लोगों को राहत देना है जिन्हें वाहन से जुड़े जरूरी काम जल्द पूरे करने हैं। जिसके बाद अब हर बार खुद कोर्ट के चक्कर लगाने के बजाय ग्राहक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।
इस सर्विस के बारे में जानकारी दे तो इसकी खास बात इसका फिक्स्ड प्राइसिंग मॉडल है। जिसको लेकर कंपनी ने बताया है कि एक कोर्ट चालान के निपटारे के लिए 3,000 रुपए की फ्लैट फीस देनी होगी। वहीं चालान की राशि और वाहन के रजिस्ट्रेशन वाले राज्य के आधार पर यह फीस बदलने की बात नहीं कही गई है। इसमें फीस के बदले Lawyered की लीगल टीम चालान से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट की कागजी कार्रवाई संभालती है। ग्राहक को अपने केस का स्टेटस ऑनलाइन देखने की सुविधा भी मिलती है।
देखा गया है कि पुराने पेंडिंग चालान कई बार वाहन की बिक्री और RC ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाओं में रुकावट बन सकते हैं। कमर्शियल वाहनों के मामले में ऐसी देरी कारोबार पर भी असर डाल सकती है। ऐसे में तेज समाधान वाहन मालिकों और फ्लीट ऑपरेटर्स दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
Lawyered ने यह भी बताया है कि उसके नेटवर्क में 80 हजार से ज्यादा लीगल प्रोफेशनल्स जुड़े हैं और यह नेटवर्क देश के करीब 98% पिन कोड्स को कवर करता है। कंपनी का दावा है कि अब तक 30 लाख से ज्यादा वाहन प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं और 3 लाख से अधिक चालानों का निपटारा कराया गया है। लेकिन किसी भी कानूनी सर्विस का इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें, दस्तावेज और 10 दिन की समयसीमा की लागू होने वाली स्थितियां जरूर जांच लेना बेहतर रहेगा।