Future of EV in India: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर हाल के दिनों में चर्चा तेज हो गई है लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रेंज एंग्जायटी जैसी चुनौतियां अब भी देश में देखने को मिल रही है। लेकिन इस बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने एक ऐसा बयान दिया है। जो देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बहस को नई दिशा दे सकता है। बता दें कि CII बिजनेस समिट 2026 में उन्होंने कहा कि Plug-in Hybrid Vehicles (PHEV) भारत को पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का रास्ता बना सकते है।
Plug-in Hybrid Vehicles के बारे में बताए तो यह ऐसी कारें होती हैं जिनमें इलेक्ट्रिक मोटर और पारंपरिक पेट्रोल या डीजल इंजन दोनों मौजूद होते हैं। जिसमें यह सीमित दूरी तक केवल बैटरी के सहारे चल सकते हैं जबकि बैटरी खत्म होने पर इंजन बैकअप का काम करता है। इस फीचर की वजह से इन कारों में फुल EV की तरह चार्जिंग खत्म होने का डर नहीं रहता। जिसको लेकर विशेषज्ञ कहते है कि PHEV तकनीक पारंपरिक वाहनों और इलेक्ट्रिक कारों के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांजिशन टेक्नोलॉजी बन सकती है।
वहीं अपने बयान में पियूष गोयल ने कहा कि अधिकांश भारतीय रोजाना 100 किलोमीटर से कम दूरी तय करते हैं। ऐसे में यदि किसी कार में लगभग 100 किलोमीटर की इलेक्ट्रिक रेंज मिल रही है और जरूरत पड़ने पर इंजन साथ हो तो यह आम ग्राहकों के लिए फायदेमंद रहेगा। इसमें ईंधन की बचत होने के साथ चार्जिंग स्टेशन खोजने की चिंता भी नहीं करनी होगी। साथ ही छोटी बैटरी होने के कारण वाहन की लागत और आयातित बैटरी सामग्री पर निर्भरता भी कम हो पाएगी।
भारत के बाजार में EV को काफी पसंद किया जा रहा है लेकिन चार्जिंग नेटवर्क अभी भी हर क्षेत्र तक नहीं पहुंचा है। जिसको देखते हुए हाइब्रिड कारें ग्राहकों को दोनों दुनिया का फायदा दे सकती है, जिसमें बेहतर माइलेज और लंबी दूरी का फायदा मिलेगा। इसको देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि हाइब्रिड तकनीक ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, ईंधन खपत कम करने और सप्लाई चेन पर दबाव घटाने में मदद कर सकती है। जिस कारण से कई ऑटो कंपनियां अब हाइब्रिड मॉडल्स पर ज्यादा फोकस करना चाहती है।
ये भी पढ़े: नई Hyundai i20 की पहली झलक आई सामने, स्पोर्टी लुक, कनेक्टेड लाइट बार और हाईटेक फीचर्स देखकर हो जाएंगे हैरान
सरकार लगातार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग नेटवर्क, मेट्रो रेल और सार्वजनिक परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर काम कर रही है। लेकिन जब तक देशभर में चार्जिंग नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता तब तक हाइब्रिड कारें एक व्यावहारिक और भरोसेमंद विकल्प बनी रह सकती हैं। ऐसे में आने वाले सालो में यह तकनीक भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिशा बदल सकती है और EV अपनाने की रफ्तार को तेज कर सकती है।