बज गई खतरे की घंटी! 2031 से पहले टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड, WMO ने जारी की डरावनी चेतावनी
WMO Global Heat Warming: विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि अगले 5 वर्षों में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है, इस रिपोर्ट के आने के बाद पर्यावरणविदों को चिंता सताने लगी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक एआई फोटो
WMO Global Heat Warming Report In Hindi: जलवायु परिवर्तन का संकट अब महज एक भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि एक डरावनी हकीकत बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख मौसम और जलवायु एजेंसी, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), ने अपनी रिपोर्ट में एक ऐसी चेतावनी जारी की है जिसने दुनियाभर के पर्यावरणविदों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक गर्मी अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी और मानवता को अब तक के सबसे गर्म वर्षों का सामना करना पड़ सकता है।
पृथ्वी के इतिहास का सबसे गर्म समय
WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 से 2030 के बीच की अवधि पृथ्वी के इतिहास की सबसे गर्म अवधि साबित हो सकती है। अनुमान है कि इस दौरान वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले (1850-1900) के स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बात की 75 प्रतिशत संभावना है कि इन पांच वर्षों का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की उस महत्वपूर्ण सीमा को पार कर जाएगा, जिसे पेरिस जलवायु समझौते के तहत सुरक्षित माना गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस सीमा को लंबे समय तक बनाए रखना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।
2027 में मंडराता खतरा
रिपोर्ट में इस बात का भी बताया गया है कि 2026 के अंत तक ‘अल नीनो‘ की स्थिति दोबारा बनने की प्रबल संभावना है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ा देती है और वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल देती है। साल 2023 और 2024 में भी इसी घटना ने रिकॉर्ड गर्मी दर्ज कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
मौसम का बदलता मिजाज ( AI फोटो )
अब आशंका जताई जा रही है कि 2026 के अल नीनो प्रभाव के कारण 2027 का वर्ष वैश्विक तापमान के मामले में एक नया काला अध्याय लिख सकता है। इसके अलावा, 91 प्रतिशत संभावना है कि 2026-2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जब तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाएगा।
मौसम के बदलते मिजाज
जलवायु परिवर्तन का सबसे भयावह असर दुनिया के बर्फीले क्षेत्रों पर पड़ रहा है। WMO ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में कई गुना अधिक तेजी से गर्म होगा।
इसका सीधा असर दुनिया भर में समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी और मौसम के अनिश्चित व्यवहार के रूप में दिखेगा। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और सूखे के पैटर्न में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे कृषि और जल आपूर्ति पर गंभीर संकट खड़ा होगा।
पर्यावरण रणनीतियों पर बढ़ेगा दबाव
आंकड़े बताते हैं कि 2015 के बाद से अब तक के 11 वर्ष इतिहास के सबसे गर्म वर्षों के रूप में दर्ज किए गए हैं, जो यह साबित करता है कि ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार थम नहीं रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में यह वृद्धि न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा करेगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा नीतियों और पर्यावरण रणनीतियों पर भी भारी दबाव डालेगी। सरकारों को अब पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने होंगे, अन्यथा पर्यावरण का यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।
