Explainer: लड़ रहे थे आजादी के लिए लड़ाई… अमेरिका ने दे डाला ‘टेरर’ का टैग, जानें BLA का पूरा सच
Who is BLA: बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसकी शाखा मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया है। आइए जानते हैं BLA क्या है जिसको लेकर पाकिस्तान को इतने पसीने छूट रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
अमेरिका ने BLA को दिया 'टेरर' का टैग, ( डिजाइन फोटो )
Pakistan Balochistan Conflict: अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी शाखा मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) के रूप में सूचीबद्ध कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह घोषणा सोमवार को की है। यह कदम ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान सरकार के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान में कहा कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन की आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनके अनुसार, किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करना इस खतरे के विरुद्ध लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान देता है और आतंकवादी गतिविधियों को मिलने वाली सहायता को रोकने का एक कारगर उपाय है। बीएलए को 2019 में कई आतंकी हमलों के बाद ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) की श्रेणी में रखा गया था।
कौन है BLA?
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सक्रिय बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) एक सशस्त्र संगठन है, जो बलूच समुदाय के लिए स्वतंत्र राष्ट्र की मांग करता है। दशकों से इसका उद्देश्य अलग बलूचिस्तान की स्थापना रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएलए का गठन पाकिस्तान द्वारा बलूच लोगों के राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक शोषण और सैन्य दमन जैसी लंबी चली आ रही समस्याओं के विरोध में हुआ। 2000 के दशक की शुरुआत में सामने आए इस संगठन को पाकिस्तान और कई पश्चिमी देश पहले से ही आतंकवादी मानते रहे हैं। अब अमेरिका ने भी इसे आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित कर दिया है।
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BLA संगठन के लोग
कैसे शुरू हुआ आंदोलन?
1947 में पाकिस्तान बनने के बाद बलूचिस्तान में पांच बड़े अलगाववादी विद्रोह हुए। 2000 के दशक की शुरुआत में संसाधनों के अधिकार की लड़ाई से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे स्वतंत्र देश की मांग में बदल गया। इसी दौर में बीएलए (बलूच लिबरेशन आर्मी) का गठन हुआ, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाब खैर बख्श मरी के बेटे बलाच मरी ने किया।
सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की सरकार ने 2006 में वरिष्ठ बलूच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या की, जिसके बाद विद्रोह और तेज हो गया। अगले साल बलाच मरी की मौत हुई और सरकार ने बीएलए पर प्रतिबंध लगा दिया। दिसंबर 2014 में बलाच मरी के पिता नवाब खैर बख्श मरी का निधन हो गया। हाल के वर्षों में बीएलए ने खुद को पाकिस्तान से बलूचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए समर्पित संगठन के रूप में स्थापित कर लिया है।
खनिज संपदा होने के बाद भी खराब है स्थिति
पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत बलूचिस्तान खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद बेहद गरीब है। 1948 में पाकिस्तान में विलय के बाद से यहां कई अलगाववादी आंदोलन हुए। 2023 की जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान की लगभग 24 करोड़ आबादी में बलूचिस्तान की जनसंख्या करीब 1.5 करोड़ है। यह प्रांत कोयला, सोना, तांबा और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बेहद समृद्ध होने के बावजूद पाकिस्तान का सबसे गरीब इलाका बना हुआ है।
BLA आर्मी
पाकिस्तान का प्रमुख समुद्री बंदरगाह ग्वादर पोर्ट भी यहीं स्थित है, जो 62 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा है। इस परियोजना का लक्ष्य दक्षिण-पश्चिमी चीन को पाकिस्तान के जरिए अरब सागर से जोड़ना है। लेकिन बलूच समुदाय का कहना है कि सरकार ने उनके संसाधनों का शोषण किया है और जनता की अनदेखी की है, जिसके चलते अलगाववादी आंदोलनों और सशस्त्र विद्रोहों को बढ़ावा मिला है।
आंदोलन से जुड़े नेताओं का अपहरण और हत्या?
मीर यार बलोच के साथ-साथ यकजेहती कमेटी की सदस्य और पेशे से डॉक्टर महरंग बलोच भी इस आंदोलन की अहम नेता हैं। उन्होंने पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वर्ष 2009 में उनके पिता, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिनको अगवा कर लिया गया था और दो साल बाद उनका शव बरामद हुआ।
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इसी तरह 2017 में उनके भाई का भी अपहरण हुआ, लेकिन विरोध प्रदर्शन के बाद वे सुरक्षित लौट आए। मार्च में पाकिस्तान सरकार ने महरंग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 14 मई 2025 को बलूच नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा की। उन्होंने इस कदम के पीछे बलूच जनता पर दशकों से हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन, अपहरण, और हिंसा को कारण बताया।
कई हमलों के पीछे BLA का हाथ
पाकिस्तान में सुरक्षा बलों का मानना है कि सरकारी ढांचे और विकास परियोजनाओं पर हुए कई हमलों के पीछे बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का हाथ है। खासतौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं को बीएलए “दमनकारी विकास” मानते हुए निशाना बनाता है। 2024 में संगठन ने दावा किया कि उसने कराची हवाई अड्डे और ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी परिसर पर आत्मघाती हमले किए। मार्च 2025 में बीएलए ने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण की जिम्मेदारी ली, जिसमें करीब 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाया गया और 31 नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की इस घटना में मौत हुई थी।
