कैलिफोर्निया के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक लॉमेकर जॉन गैरामेंडी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Trump’s Strict Immigration Policy Impact: अमेरिका में इमिग्रेशन नीति हाल के वर्षों में एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गई है, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के कारण। कैलिफोर्निया के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक लॉमेकर जॉन गैरामेंडी ने एक भारतीय-अमेरिकी महिला हरजीत कौर के डिपोर्टेशन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अपनी स्टेट ऑफ द यूनियन गेस्ट सीट को खाली रखकर इस बुजुर्ग महिला के प्रति अपना सम्मान और विरोध प्रकट किया है। ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत हजारों परिवारों को इस मानवीय संकट और दर्दनाक अलगाव का सामना करना पड़ रहा है।
सांसद गैरामेंडी ने कहा कि यह खाली सीट उन सभी लोगों का प्रतीक है जिन्हें मौजूदा नीतियों के तहत बेदर्दी से हिरासत में लिया गया। हरजीत कौर को आधी रात के समय इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा जबरन हिरासत में लिया गया और बिना किसी पूर्व सूचना के भारत भेज दिया गया। यह सीट उन निर्दोष लोगों के लिए है जिन्होंने अमेरिकी व्यवस्था में अपनी जान गंवाई या जिन्हें अपने प्रियजनों से अलग होना पड़ा।
हरजीत कौर 1990 के शुरुआती वर्षों से अमेरिका में रह रही थीं और वे एक लंबे समय तक वहां की एक सक्रिय सदस्य थीं। उनका असाइलम केस वर्ष 2012 में खारिज हो गया था, जिसके बाद भी वे लगातार 13 वर्षों तक अधिकारियों के सामने हाजिरी देती रहीं। वे हर छह महीने में सैन फ्रांसिस्को में इमिग्रेशन विभाग के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराती थीं जो उनके कानून पालन को दर्शाता है।
हिरासत के दौरान 73 वर्षीय कौर को कई अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जिसमें उन्हें घंटों तक फर्श पर सोना पड़ा था। उन्हें जंजीरों में बांधकर रखा गया और उनके धार्मिक विश्वासों के खिलाफ शाकाहारी भोजन देने से भी साफ तौर पर इनकार कर दिया गया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें पूरे दिन भोजन नहीं दिया गया और केवल एक बर्फ का कटोरा थमाकर भूखा छोड़ दिया गया।
हरजीत कौर घुटने के ऑपरेशन, थायरॉयड और पुरानी माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं जिसके लिए उन्हें निरंतर दवाओं की जरूरत थी। हिरासत में उन्हें डॉक्टर या नर्स से मिलने का मौका नहीं मिला और जरूरी दवाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। भारत लौटने के बाद भी उनकी स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं और वहां उनकी देखभाल के लिए परिवार का कोई सदस्य नहीं है।
सांसद गैरामेंडी ने तर्क दिया कि ट्रंप प्रशासन खतरनाक अपराधियों के बजाय निर्दोष बुजुर्गों और परिवारों को निशाना बना रहा है जो बेहद गलत है। कौर के परिवार ने उनके साथ भारत जाने की पूरी तैयारी की थी लेकिन उन्हें अलविदा कहने का भी एक मौका नहीं दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि इमिग्रेशन नीतियों की मानवीय कीमत कितनी अधिक है और यह कैसे समाज के सबसे कमजोर वर्ग को प्रभावित करती है।
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अमेरिका में भारतीय नागरिकों को हाल के समय में इमिग्रेशन संबंधी कड़े नियमों और कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है जो चिंताजनक है। जॉन गैरामेंडी का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि और उसकी लोकतांत्रिक साख पर सवाल उठाने वाला एक बड़ा संकेत है। अब समय आ गया है कि ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए जो मानवता और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं।
वर्तमान में हरजीत कौर भारत में अपने परिवार से दूर संघर्ष कर रही हैं और उनकी स्थिति लगातार और अधिक खराब होती जा रही है। उनकी खाली सीट अब एक स्थायी स्मारक की तरह काम करेगी जो न्याय की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं को निरंतर प्रेरित करती रहेगी। मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए अमेरिकी राजनीति में अब एक बड़े बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है जो सबको सुरक्षा दे।