सऊदी-UAE में आई बड़ी दरार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Saudi UAE Yemen Issue: मिडिल ईस्ट के दो सबसे बड़े सहयोगियों, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तहनून बिन जायद को एक कड़ा और लंबा पत्र भेजकर सूडान और यमन में उनकी गतिविधियों पर गंभीर नाराजगी जताई है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वह सूडान के गृहयुद्ध में यूएई की भूमिका को और बर्दाश्त नहीं कर सकते। सऊदी अरब का मानना है कि यूएई द्वारा सूडान की पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) को दिया जा रहा समर्थन उसकी क्षेत्रीय सुरक्षा के खिलाफ है। इसके अलावा, यमन को लेकर भी सऊदी अरब का रुख बेहद सख्त रहा। पत्र में कहा गया कि सऊदी अरब यमन को अपना ‘प्रभाव क्षेत्र’ मानता है और वहां की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी लेने की योजना रखता है।
रिश्तों में तल्खी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर में सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर यूएई के हथियारों की खेप पर बमबारी की थी। यह कार्रवाई यूएई समर्थित अलगाववादी गुटों को सैन्य मदद देने के विरोध में की गई थी, जिसे सऊदी ने अपनी मंजूरी के बिना दी गई ‘रेड लाइन’ बताया था।
इस पत्र की एक खास बात यह रही कि इसे इस तरह से लिखा गया था कि वॉशिंगटन भी सऊदी के संदेश को समझ सके। सऊदी अरब चाहता था कि अमेरिका को भी पता चले कि उसे यूएई की गतिविधियों से कितनी परेशानी है।
दिलचस्प बात यह है कि यूएई को संदेह था कि सऊदी अरब अमेरिका के जरिए उस पर प्रतिबंध लगवाने की कोशिश कर रहा है, जिसे सऊदी ने सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हफ्ते सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच दरार है, हालांकि उन्होंने इसे आसानी से सुलझाने की बात कही।
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जिन्हें यह पत्र भेजा गया है, वे तहनून बिन जायद (जिन्हें ‘स्पाई शेख’ भी कहा जाता है) यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के भाई हैं। वे अमीरात के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होने के साथ-साथ अबू धाबी के बड़े निवेश फंड की देखरेख भी करते हैं और अक्सर पर्दे के पीछे कूटनीतिक भूमिका निभाते रहे हैं।