क्या है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी? जिसके खौफ से दहल उठा ईरान, इजरायल-अमेरिका ने मचाई तबाही

इजरायल ने शनिवार को ईरान पर हमला बोल दिया है। जिसके बाद अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान में ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' शुरू किया है। चलिए जानते हैं इसका मतलब क्या है?
Operation EPIC FURY
Trump, Netanyahu, Khamenei (Designed Image)
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Operation EPIC FURY: इजरायल ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला बोल दिया, इसके कुछ देर बाद ही अमेरिका ने भी ईरान पर कार्रवाई करते हुए अटैक कर दिया। ईरान में की गई इस कार्रवाई को अमेरिका ने ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया है।

ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' से मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और वॉशिंगटन, तेल अवीव और तेहरान के बीच लंबे समय से चल रहा शैडो कॉन्फ्लिक्ट अब बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में बदल गया है। इस ऑपरेशन की जानकारी खुद अमेरिका ने दी है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने इस ऑपरेशन की जानकारी दी।

कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?

ईरान के खिलाफ हमले सबसे पहले इजरायल ने शुरू किए, जिसकी जानकारी खुद इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने दी, उन्होंने बताया कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया है। बताया जा रहा है कि इजरायल ने अपने एयरक्राफ्ट से "प्री-एम्प्टिव" ऑपरेशन करके हमले शुरू किए जिसके तुरंत बाद अमेरिकी सेना ऑपरेशन का हिस्सा बन गई और ईरानी टारगेट पर हमले शुरू कर दिए।

अमेरिका का बड़ा दावा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने यह दावा किया है कि अमेरिकी नेवी के जहाजों ने ईरानी ठिकानों पर टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया और पुष्टि की कि ईरान पर हमले में अमेरिका भी शामिल है। इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्स ने बयान जारी कर पूरे इसराइल में 'विशेष और स्थायी आपातकाल स्थिति' की घोषणा कर दी है।

कब तक चलेगा 'एपिक फ्यूरी'?

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट दावा कर रही है कि यह एक फेज्ड ऑपरेशन है न कि पहले की तरह एक दिन की स्ट्राइक, जिसके चलते यह काफी लंबे दिनों तक चलेगा और इसे अफगानिस्तान में सेना वापसी के बाद अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है।

क्यों बीच में आया अमेरिका?

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाए और यूएस के साथ एक डील साइन करे। लेकिन ईरान अमेरिका की इस डील को मानने से इनकार करता रहा,ऐसे में जब ईरान के अंदर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं और देश अशांति से जूझ रहा है तो ट्रंप को इसमें एक मौका दिख रहा है।

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